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Parvez Zaami
khush-zabaani to farz hai un par
khush-zabaani to farz hai un par | ख़ुश-ज़बानी तो फ़र्ज़ है उन पर
- Parvez Zaami
ख़ुश-ज़बानी
तो
फ़र्ज़
है
उन
पर
जिस
किसी
को
भी
उर्दू
आती
है
- Parvez Zaami
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तुम्हारा
नाम
लिया
था
कभी
मोहब्बत
से
मिठास
उस
की
अभी
तक
मेरी
ज़बान
में
है
Abbas Dana
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गले
मिली
कभी
उर्दू
जहाँ
पे
हिन्दी
से
मिरे
मिज़ाज
में
उस
अंजुमन
की
ख़ुशबू
है
Satish Shukla Raqeeb
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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ज़रा
नज़दीक
आकर
सुन
मेरी
इक
बात
ऐ
उर्दू
मेरी
तहरीर
बिन
तेरे
मुकम्मल
हो
नहीं
सकती
Avtar Singh Jasser
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नादानी
ये
ज़रा
सी
ले
ले
न
जान
मेरी
फूलों
से
भर
रखी
है
मैंने
मयान
मेरी
हैं
आपको
जो
शिकवे
मेरी
ज़बान
से
जाँ
तो
काट
लें
लबों
से
अपने
ज़बान
मेरी
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vivek sahu
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बात
करने
का
हसीं
तौर-तरीक़ा
सीखा
हम
ने
उर्दू
के
बहाने
से
सलीक़ा
सीखा
Manish Shukla
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आज
भी
'प्रेम'
के
और
'कृष्ण'
के
अफ़्साने
हैं
आज
भी
वक़्त
की
जम्हूरी
ज़बाँ
है
उर्दू
Ata Abidi
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सब
इंतज़ार
में
थे
कब
कोई
ज़बान
खुले
फिर
उसके
होंठ
खुले
और
सबके
कान
खुले
Umair Najmi
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इन
हवाओं
में
ज़रा
सी
ख़ुशबू
हज़रत
घोलिए
थोड़ी
हिंदी
थोड़ी
सी
उर्दू
यहाँ
पर
बोलिए
Navneet krishna
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इज़हार
पे
भारी
है
ख़मोशी
का
तकल्लुम
हर्फ़ों
की
ज़बाँ
और
है
आँखों
की
ज़बाँ
और
Haneef akhgar
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दुनिया
कितनी
ही
ख़ूब-सूरत
हो
आप
बाहम
नहीं
तो
कुछ
भी
नहीं
Parvez Zaami
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सोचता
हूँ
तिरे
अलावा
तो
ये
क़लम
मुझ
से
रूठ
जाती
है
Parvez Zaami
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कहते
हैं
लोग
जिस
को
सनम
बादा-ए-इरम
वो
तो
तिरे
लबों
की
हलावत
का
नाम
है
Parvez Zaami
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इक
हमीं
तो
हैं
दीद
के
क़ाबिल
तू
हमीं
से
नज़र
चुराती
है
Parvez Zaami
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ऐ
न
जा
दिल-नशीन
छोड़
के
दिल
विनती
करता
है
हाथ
जोड़
के
दिल
तेरे
जाने
के
बाद
जान-ए-दिल
रख
लिया
हम
ने
तो
सिकोड़
के
दिल
है
गुनाह-ए-अज़ीम
दिल-शिकनी
ओ
ख़ुदारा
न
जाओ
तोड़
के
दिल
कुछ
न
निकलेगा
तेरे
ग़म
के
ब-जुज़
देख
लेना
नहीं
निचोड़
के
दिल
क्या
सुबूत-ए-वफ़ा
दें
तुझ
को
हम
पास
कुछ
भी
नहीं
है
छोड़
के
दिल
कैसे
'ज़ामी'
कटेगी
आज
की
शब
वो
सर-ए-शब
गए
हैं
तोड़
के
दिल
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Parvez Zaami
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