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Parvez Zaami
duniya kitnii hi khoobsurat ho
duniya kitnii hi khoobsurat ho | दुनिया कितनी ही ख़ूब-सूरत हो
- Parvez Zaami
दुनिया
कितनी
ही
ख़ूब-सूरत
हो
आप
बाहम
नहीं
तो
कुछ
भी
नहीं
- Parvez Zaami
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जिस
से
पूछे
तेरे
बारे
में
यही
कहता
है
ख़ूब-सूरत
है
वफ़ादार
नहीं
हो
सकता
Abbas Tabish
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मुझको
ग़ैरों
की
बाँहों
से
भी
प्यारी
हैं
तेरी
यादों
में
जो
रातें
गुज़ारी
हैं
Harsh saxena
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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हसीन
लड़की
से
दिल
लगाना
भी
इक
ख़ता
है
मुझे
पता
है
अगर
सज़ा
में
मिले
क़ज़ा
तो
अलग
मज़ा
है
मुझे
पता
है
Jatin shukla
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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संग-ए-मरमर
की
मूरत
नहीं
आदमी
इस
क़दर
ख़ूब-सूरत
नहीं
आदमी
चंद
क़िस्सों
की
दरकार
है
बस
इसे
आदमी
की
ज़रूरत
नहीं
आदमी
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anupam shah
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तुम
मुझे
उतनी
ही
प्यारी
हो
मेरी
जाँ
जितना
प्यारा
है
कश्मीर
इस
देश
को
Alankrat Srivastava
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मिरी
ग़ज़ल
की
तरह
उस
की
भी
हुकूमत
है
तमाम
मुल्क
में
वो
सब
से
ख़ूब-सूरत
है
बहुत
दिनों
से
मिरे
साथ
थी
मगर
कल
शाम
मुझे
पता
चला
वो
कितनी
ख़ूब-सूरत
है
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Bashir Badr
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ख़्वाब
इतना
भी
हसीं
मत
देखो
नींद
टूटे
तो
न
ये
शब
गुज़रे
anupam shah
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सारी
तेरी
मर्ज़ी
है
पर,
दिल
में
है
एक
बात
कहूँ
ज़ुल्फ़ें
इतनी
सुंदर
हो
तो,
बाँधी
थोड़ी
जाती
है
Prashant Sharma Daraz
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आ
गया
ख़ुदा
का
ख़त
'ज़ामी'
की
ज़रूरत
है
Parvez Zaami
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अपने
खूँ
से
चमन
को
सींचा
है
फिर
भी
बे-एतिबार
हैं
हम
लोग
Parvez Zaami
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आप
की
इल्तिफ़ात
है
साक़ी
रक़्स
में
जो
हयात
है
साक़ी
तू
तरन्नुम
में
गाए
मेरी
ग़ज़ल
मैं
कहूँ
क्या
ही
बात
है
साक़ी
इतनी
तो
दे
कि
होश
आ
जाए
तेरा
दिल
तो
फ़ुरात
है
साक़ी
साग़र-ए-मय
नहीं
है
हाथों
में
हाथ
में
काइनात
है
साक़ी
छोड़
कर
तेरे
मय-कदे
को
बस
हर
जगह
ज़ात-पात
है
साक़ी
मुस्कुरा
के
तू
गर
पिलाए
तो
एक
क़तरा
फ़ुरात
है
साक़ी
पीने
का
अज्र
मिल
ही
जाएगा
एक
तौबा
की
बात
है
साक़ी
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Parvez Zaami
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जिन
की
मंज़िल
गुलाब
होती
है
उन
की
राहों
में
ख़ार
होते
हैं
Parvez Zaami
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मुस्कुरा
के
तू
गर
पिलाए
तो
एक
क़तरा
फ़ुरात
है
साक़ी
Parvez Zaami
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