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Parvez Zaami
kaar-gar meri maut ho jaati
kaar-gar meri maut ho jaati | कार-गर मेरी मौत हो जाती
- Parvez Zaami
कार-गर
मेरी
मौत
हो
जाती
चंद
आँसू
बहा
दिए
होते
- Parvez Zaami
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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मैं
चाहता
था
मुझ
सेे
बिछड़
कर
वो
ख़ुश
रहे
लेकिन
वो
ख़ुश
हुआ
तो
बड़ा
दुख
हुआ
मुझे
Umair Najmi
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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जब
तलक
सूरज
को
ग्रहण
लगे
'ज़ामी'
चाँद
का
क़िस्सा
सुनाओ
अँधेरा
है
Parvez Zaami
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एक
लड़की
है
मुस्कुराती
है
मोजिज़े
हुस्न
के
दिखाती
है
Parvez Zaami
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इक
गली
दरमियान
पड़ती
है
फिर
ख़ुदी
दरमियान
पड़ती
है
कर
तो
दें
तर्क-ए-मय-कशी
वाइज़
तिश्नगी
दरमियान
पड़ती
है
जी
तो
करता
है
छेड़
लूँ
उस
को
सादगी
दरमियान
पड़ती
है
दूरियाँ
हसरतों
से
है
इतनी
मुफ़्लिसी
दरमियान
पड़ती
है
राह-ए-मुल्क-ए-अदम
नहीं
आसाँ
ज़िंदगी
दरमियान
पड़ती
है
शौक़-ए-इज़हार
तो
है
पर
'ज़ामी'
दोस्ती
दरमियान
पड़ती
है
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Parvez Zaami
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सुर्ख़-फूलों
के
हार
हैं
हम
लोग
लोग
कहते
हैं
ख़ार
हैं
हम
लोग
अपने
ख़ूँ
से
चमन
को
सींचा
है
फिर
भी
बे-ऐतिबार
हैं
हम
लोग
सर-ज़मीन-ए-वतन
गवाह
रहे
मुल्क
के
पासदार
हैं
हम
लोग
चश्म-ए-बद-बीन
से
न
देख
हमें
यार
उल्फ़त-शिआर
हैं
हम
लोग
हम
गदा
हैं
रसूल-ए-अरबी
के
वाक़ई
ताजदार
हैं
हम
लोग
हम
से
ही
रौनक़-ए-चमन
'ज़ामी'
सच
है
जान-ए-बहार
हैं
हम
लोग
लोग
कुछ
भी
कहें
मगर
'ज़ामी'
बा-सफ़ा
बा-वक़ार
हैं
हम
लोग
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Parvez Zaami
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दिल-फ़िगारों
से
दोस्ती
कर
ली
यार
यारों
से
दोस्ती
कर
ली
वो
नहीं
आए
जब
शब-ए-वादा
चाँद-तारों
से
दोस्ती
कर
ली
जब
गुलों
से
नहीं
बनी
मेरी
ख़ार-ज़ारों
से
दोस्ती
कर
ली
काम
आएँगे
बाद-ए-मुर्दन
भी
दीन-दारों
से
दोस्ती
कर
ली
एक
दिन
तंग
आ
के
फूलों
से
मैंने
ख़ारों
से
दोस्ती
कर
ली
आ
गई
रास
दुनिया
भी
'ज़ामी'
दुनिया-दारों
से
दोस्ती
कर
ली
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Parvez Zaami
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