mahtaab tere rukh ki ziyaarat ka naam hai | महताब तेरे रुख़ की ज़ियारत का नाम है

  - Parvez Zaami
महताबतेरेरुख़कीज़ियारतकानामहै
सिंदूरतेरीमाँगकाउल्फ़तकानामहै
तकलीफ़देरहीहैमुझेबे-रुख़ीतिरी
नज़रेंचुरानातेराअज़िय्यतकानामहै
वल्लाहपासकुछभीनहींख़ारकेसिवा
जोआपमाँगतेहैंवोनिकहतकानामहै
कहतेहैंलोगजिसकोसनमबादा-ए-इरम
वोतोतिरेलबोंकीहलावतकानामहै
मुरझागएहैंफूलयाँअहद-ए-बहारमें
कश्मीरकीसुनाथायेजन्नतकानामहै
पूछेगामुझसेगरकोईबारेमेंइश्क़के
कहदूँगासाफ़-साफ़मुसीबतकानामहै
तुमसेयेकिसनेकहदियाफुर्क़त-ज़दाहूँमैं
'ज़ामी'तोमेरीजानमसर्रतकानामहै
  - Parvez Zaami
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