chand lamhon ki iqaamat si hoti hai | चंद लम्हों की इक़ामत सी होती है

  - Parvez Zaami
चंदलम्होंकीइक़ामतसीहोतीहै
दुनियाइकवक़्तीसुकूनतसीहोतीहै
आपजबहँसतेहैंदौरान-ए-गुफ़्तुगू
ख़ाना-ए-दिलमेंमसर्रतसीहोतीहै
वोलतीफ़ेभीसुनातेहैंइसतरह
जिसतरहवाज़-ओ-नसीहतसीहोतीहै
जबभीसुनताहूँफ़सानाअय्यूबका
मुफ़्लिसीमेंभीक़नाअतसीहोतीहै
आपकेरू-ए-दरख़्शाँकोदेखकर
माह-ए-कामिलकोभीहैरतसीहोतीहै
येभीइकतश्ख़ीसहैमरज़-ए-इश्क़की
दर्दमेंभीएकलज़्ज़तसीहोतीहै
पहलेहोतीथीमोहब्बतभीकोईशय
अबतोजिस्मोंकीतिजारतसीहोतीहै
ज़ख़्मभीउसकेदिएऐसेलगतेहैं
'ज़ामी'जैसेकोईनेमतसीहोतीहै
  - Parvez Zaami
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