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Pankaj murenvi
uske baazu men kitne bhi log rahen baithe
uske baazu men kitne bhi log rahen baithe | उसके बाज़ू में कितने भी लोग रहें बैठे
- Pankaj murenvi
उसके
बाज़ू
में
कितने
भी
लोग
रहें
बैठे
दरख़्त
छाँव
में
रखना
वो
हमको
चाहता
है
बस
- Pankaj murenvi
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इसी
लिए
तो
यहाँ
अब
भी
अजनबी
हूँ
मैं
तमाम
लोग
फ़रिश्ते
हैं
आदमी
हूँ
मैं
Bashir Badr
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रफ़्ता
रफ़्ता
सब
कुछ
समझ
गया
हूँ
मैं
लोग
अचानक
टैरेस
से
क्यूँ
कूद
गए
Shadab Asghar
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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कुछ
लोग
हैं
जो
झेल
रहे
हैं
मुसीबतें
कुछ
लोग
हैं
जो
वक़्त
से
पहले
बदल
गए
Shakeel Jamali
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मिरे
किरदार
जाने
दे
नज़रअंदाज
कर
दे
ख़ुदा
की
फ़िल्म
है
ये
आदमी
से
क्या
शिकायत
Vikram Sharma
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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मोहब्बत
एक
ख़ुशबू
है
हमेशा
साथ
चलती
है
कोई
इंसान
तन्हाई
में
भी
तन्हा
नहीं
रहता
Bashir Badr
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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जब
से
तार
मुहब्बत
के
मैंने
बाँधे
हैं
तुम
से
पूरे
जीवन
की
वीणा
के
सुर
सारे
है
तुम
से
Pankaj murenvi
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मैंने
जाँचा
मैंने
परखा
है
सावन
में
याद
बहुत
बीता
पल
आता
है
सावन
में
पैसों
की
ख़ातिर
छोड़ा
था
माँ
का
आँचल
अब
मुश्किल
से
जाना
होता
है
सावन
में
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Pankaj murenvi
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हम
जब
कहती
हैं
मेरी
आँखें
दुख
में
बहती
हैं
मेरी
आँखें
चिट्ठी
ख़त
सब
यादों
के
ग़म
को
तेरे
सहती
हैं
मेरी
आँखें
पूछो
कभी
तो
इनसे
कितना
कुछ
तुम
से
कहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
भी
हैं
क्या
इंतिज़ार
में
जैसे
रहती
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
आँखों
में
पंकज
वो
क्या
अब
भी
रहती
हैं
मेरी
आँखें
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Pankaj murenvi
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मुझको
किताब
ख़ाना
घर
में
रखना
है
इक
उसके
देखी
हैं
हाथों
में
किताब
जब
से
Pankaj murenvi
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इश्क़
मुहब्बत
मेरे
बस
की
बात
नहीं
है
ये
तुम
अपने
चरणों
में
लेलो
कान्हा
मुझको
तो
Pankaj murenvi
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