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Pankaj murenvi
mujhko kitaab khana ghar men rakhna hai ik
mujhko kitaab khana ghar men rakhna hai ik | मुझको किताब ख़ाना घर में रखना है इक
- Pankaj murenvi
मुझको
किताब
ख़ाना
घर
में
रखना
है
इक
उसके
देखी
हैं
हाथों
में
किताब
जब
से
- Pankaj murenvi
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ये
हुनर
रब
ने
मेरी
ज़ात
में
रक्खा
हुआ
है
अच्छे
अच्छो
को
भी
औक़ात
में
रक्खा
हुआ
है
Fareeha Naqvi
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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हमने
सब
सीखा
था
उसके
ख़ातिर
बस
भूल
उसे
ख़ुद
जीना
सीख
नहीं
पाए
Surya Tiwari
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ये
हुनर
जो
आ
जाए,
आपका
ज़माना
है
पाँव
किसके
छूने
हैं,
सर
कहाँ
झुकाना
है
Astitwa Ankur
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ऐसा
मकाँ
मिला
था
इश्क़
में
हमको
तो
न
रौशनी
को
खिड़की
न
ही
हवा
को
कुछ
Pankaj murenvi
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बढ़ता
सरदर्द
रहा
दिल
में
जब
तक
शब-गर्द
रहा
दिल
में
था
पाक
तरफ़
से
मेरे
तो
उसके
ही
गर्द
रहा
दिल
में
उसका
था
होके
रहना
बस
ये
बाकी
कर्द
रहा
दिल
में
गर्मी
थी
तुझ
सेे
बाद
तिरे
मौसम
भी
सर्द
रहा
दिल
में
पत्थर
पर
सर
मारा
मैंने
भी
बस
ये
दर्द
रहा
दिल
में
दुश्मन
ही
मेरे
दिल
का
है
बनके
हमदर्द
रहा
दिल
में
जो
गुज़री
हम
पर
ही
गुज़री
पंकज
बे-दर्द
रहा
दिल
में
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Pankaj murenvi
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तिरी
निगाहों
में
अब
वार
नहीं
है
वो
हम
सेे
लगता
है
अब
प्यार
नहीं
है
वो
है
जिसके
साथ
बैठना
भी
उठना
भी
दोस्त
है
केवल
तेरा
यार
नहीं
है
वो
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Pankaj murenvi
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मुझको
भी
है
प्यास
मुहब्बत
की
लेकिन
लडक़ी
मुझको
सराब
सी
लगती
है
वो
Pankaj murenvi
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नियम
मुहब्बत
में
देखता
रहा
मैं
और
जब
तक
उसको
गुलाब
दे
आया
कोई
Pankaj murenvi
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