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Pankaj murenvi
shaa
shaa | शादी करके छीन लिया घर मुझ मुफ़लिस का
- Pankaj murenvi
शादी
करके
छीन
लिया
घर
मुझ
मुफ़लिस
का
उसकी
बाँहें
ही
तो
थी
दर
मुझ
मुफ़लिस
का
- Pankaj murenvi
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मुझे
अब
तुम
से
डर
लगने
लगा
है
तुम्हें
मुझ
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
Jaun Elia
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माँ
मुझे
देख
के
नाराज़
न
हो
जाए
कहीं
सर
पे
आँचल
नहीं
होता
है
तो
डर
होता
है
Anjum Rehbar
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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इस
दर
का
हो
या
उस
दर
का
हर
पत्थर
पत्थर
है
लेकिन
कुछ
ने
मेरा
सर
फोड़ा
हैं
कुछ
पर
मैं
ने
सर
फोड़ा
है
Zubair Ali Tabish
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दिल-ए-मकाँ
से
चकाँ
अँधेरा
छँटने
लगेगा
ये
अगर
मुहब्बत
करने
को
राज़ी
हो
जाए
वो
Pankaj murenvi
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ये
दुख
दर्द
मेरे
सीने
से
नइँ
जाता
मैं
घर
पर
हूँ
बाबा
काम
पे
जाते
हैं
Pankaj murenvi
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मिटा
मुहब्बत
से
दूँ
डर
को
उसके
जो
मुझे
पता
लग
जाए
गर
उसके
डर
का
उसके
ख़त
का
जवाब
लिखना
है
मुझको
नया
पता
मिल
जाए
गर
उसके
घर
का
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Pankaj murenvi
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ए
दिल
के
चारा-गर
तिरी
मुहब्बत
के
बीमार
हमें
लगते
हैं
तेरे
बिन
ये
बस्ती
ये
पेड़
फूल
सब
बेकार
हमें
लगते
हैं
Pankaj murenvi
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तुझको
सींचा
बस
मैंने
है
मुहब्बत
से
तेरी
जवानी
का
बस
इक
हकदार
हूँ
मैं
Pankaj murenvi
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