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Pankaj murenvi
bas mere yaar khwaab men aa jaa.e vo ladki
bas mere yaar khwaab men aa jaa.e vo ladki | बस मेरे यार ख़्वाब में आ जाए वो लड़की
- Pankaj murenvi
बस
मेरे
यार
ख़्वाब
में
आ
जाए
वो
लड़की
मिलने
चाहे
हिजाब
में
आ
जाए
वो
लड़की
लिखता
हूँ
ख़त
ज़ेहन
में
आता
है
चेहरा
उसका
लिख
दूँ
मैं
गर
किताब
में
आ
जाए
वो
लड़की
यार
लगेंगे
जलने
मुझ
सेे
गुलाब
सी
दिखती
मुफ़लिस
के
गर
हिसाब
में
आ
जाए
वो
लड़की
कर
दूँगा
विद्रोह
मुहब्बत
के
हक
में
मैं
भी
पंकज
गर
इंक़लाब
में
आ
जाए
वो
लड़की
- Pankaj murenvi
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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मिलना
हमारा
कम
हुआ
फिर
बात
कम
हुई
क़िस्तों
में
मुझ
ग़रीब
की
ख़ैरात
कम
हुई
Bhawana Srivastava
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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ग़रीब
लोग
कहाँ
ख़ुद
को
बचा
पाएँगे
वबास
बच
भी
गए
भूख
से
मर
जाएँगे
Astitwa Ankur
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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खड़ा
हूँ
आज
भी
रोटी
के
चार
हर्फ़
लिए
सवाल
ये
है
किताबों
ने
क्या
दिया
मुझ
को
Nazeer Baaqri
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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पाल
रखा
है
इन
आँखों
ने
भी
एक
ख़्वाब
तुम
से
मिले
हमें
भी
इस
वेलेंटाइन
डे
गुलाब
तुम
से
Pankaj murenvi
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मेरे
बिन
वो
महफ़िल
कहाँ
सजाके
बैठा
होगा
यार
परिन्दा
वो
अब
किस
घर
जाके
बैठा
होगा
हम
ही
एक
नहीं
शामिल
होंगे
सूची
में
उसकी
जाने
कितनों
को
हम
ख़्याल
बनाके
बैठा
होगा
मज़ाक
उसने
कितनों
का
है
इश्क़
बनाया
होगा
जाने
कितनों
को
ये
खेल
सिखाके
बैठा
होगा
कोई
होगा
क्या
अब
भी
उसका
लख़्त-ए-दिल
जिसको
वो
दिल
से
पंकज
की
तरह
लगा
के
बैठा
होगा
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Pankaj murenvi
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नज़र
में
है
मुहब्बत
बस
हमारे
तो
मुहब्बत
भर
के
ही
देखा
करेंगे
हम
Pankaj murenvi
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जितने
भी
हैं
अच्छे
हैं
सच्चे
हैं
लेकिन
फिर
भी
दो
एक
यार
पहले
से
कम
हैं
अब
Pankaj murenvi
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गोद
कई
लेने
हैं
ग़म
मुझको
उसके
यादों
में
दिन
नहीं
गुजरते
अब
मेरे
Pankaj murenvi
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