कह नहीं पाता जो मैं लफ़्ज़ों से

  - Milan Gautam
कहनहींपाताजोमैंलफ़्ज़ोंसे
तुमसमझतीनहींइशारोंसे
आरज़ूहैकितेरीमाँगभरूँ
लेकेसिंदूरअपनेहाथोंसे
हरसुख़नमेंवोशे'रढूँढताहै
इश्क़होजाएजिसकोग़ज़लोंसे
मैंजोहरबारहोताहूँघाइल
तीरचलतेहैंउसकीआँखोंसे
मैंनेतोउसकेहोंठचूमनेहैं
कामकबतकचलाऊँगालोंसे
एतिमादीरक़ीबअच्छेहैं
बद-गुमानी-परस्तयारोंसे
तुमनेमुझजैसेपेड़ोंकोछुआनइँ
पत्तेझड़नेलगेहैंशाख़ोंसे
अपनीकश्तीठिकानेलगजाए
क्याहीमतलबहमेंकिनारोंसे
उसकीपायलअगरनहींखनकी
मैंनेलड़पड़नाहैसुनारोंसे
चेहरेपरतिलतोअच्छालगताहै
चाँदकाहुस्नहैहीदाग़ोंसे
अश्कोंकाबहनालाज़िमीहै'मिलन'
धुलतेहैंग़मकेदाग़अश्कोंसे
  - Milan Gautam
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