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Praveen Sharma SHAJAR
dil kii aab-o-hawa udaasi hai
dil kii aab-o-hawa udaasi hai | दिल की आब-ओ-हवा उदासी है
- Praveen Sharma SHAJAR
दिल
की
आब-ओ-हवा
उदासी
है
धड़कनों
की
सदा
उदासी
है
हो
के
नाकाम
चारा-गर
बोला
आशिक़ी
में
दवा
उदासी
है
बाद
आए
शराब
भी
इसके
यूँँ
कि
पहला
नशा
उदासी
है
ज़िंदगी
में
उदासी
है
कितनी
ज़िंदगी
है
भी
या
उदासी
है
मैंने
देखा
है
बारहा
हँस
कर
यार
हर
मर्तबा
उदासी
है
कौन
सा
जुर्म
हो
गया
हम
से
जाने
किस
की
सज़ा
उदासी
है
- Praveen Sharma SHAJAR
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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नशा
पिला
के
गिराना
तो
सब
को
आता
है
मज़ा
तो
तब
है
कि
गिरतों
को
थाम
ले
साक़ी
Allama Iqbal
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तेरी
यादों
ने
मुझे
बदनाम
कर
रक्खा
है
कुछ
यूँँ
लोग
कहते
हैं
कि
लड़का
ये
शराबी
बन
चुका
है
Harsh saxena
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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वो
गर
शराब
है
तो
समझो
कि
मैं
नशा
हूँ
कुछ
इस
तरह
से
भीतर
उस
शख़्स
के
बसा
हूँ
Harsh saxena
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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नमकीं
गोया
कबाब
हैं
फीके
शराब
के
बोसा
है
तुझ
लबाँ
का
मज़े-दार
चटपटा
Abroo Shah Mubarak
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शराबों
से
ख़ुमारी
आ
रही
है
नशा
तेरा
उतरता
जा
रहा
है
anupam shah
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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सूखे
पत्ते
आग
पकड़ते
हों
जैसे
ऐसे
मेरे
दिल
को
ग़मों
ने
पकड़ा
है
Praveen Sharma SHAJAR
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उसके
बिन
तुम
रह
सकते
हो
समझो
मत
ख़ुद
को
शायर
कह
सकते
हो
समझो
मत
सबको
अपना
समझा
तब
ये
समझा
है
सबको
अपना
कह
सकते
हो
समझो
मत
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Praveen Sharma SHAJAR
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जितना
रोना
था
रो
चुके
हो
तुम
अब
तो
मरने
से
हल
निकलना
है
Praveen Sharma SHAJAR
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ग़ालिब
जैसे
शे'र
नहीं
कहते
तो
क्या
क़र्ज़ा
तो
हम
पर
भी
दिल्ली
भर
का
है
Praveen Sharma SHAJAR
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बदन
बदन
सफ़र
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
घुटन
घुटन
बसर
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
मुझे
ख़बर
नहीं
कि
इश्क़
रूह
का
है
क्या
बला
बदन
लहू
से
तर
किया
मुहब्बतों
की
आस
में
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Praveen Sharma SHAJAR
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