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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
kahaan girti rahi baarish tujhe maaloom hogii nasahaabo ki sabhi saazish tujhe maaloom hogii na
kahaan girti rahi baarish tujhe maaloom hogii nasahaabo ki sabhi saazish tujhe maaloom hogii na | कहाँ गिरती रही बारिश तुझे मालूम होगी ना
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
कहाँ
गिरती
रही
बारिश
तुझे
मालूम
होगी
ना
सहाबों
की
सभी
साज़िश
तुझे
मालूम
होगी
ना
महक
फूलों
की
बाग़ों
से
कहाँ
लाकर
छुपानी
है
हवा
की
आख़िरी
ख़्वाहिश
तुझे
मालूम
होगी
ना
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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हम
इक
ही
लौ
में
जलाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
नई
हवा
से
बचाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
दरअस्ल
उसको
फ़क़त
चाय
ख़त्म
करनी
थी
हम
उसके
कप
को
सुनाते
रहे
ग़ज़ल
अपनी
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Zubair Ali Tabish
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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ऊपर
उठती
हुई
एक
गर्म
हवा
है
मिरा
दर्द
मेरा
लहजा
कभी
फ़रियाद
नहीं
हो
सकता
Farhat Ehsaas
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रखते
हैं
मोबाइल
में
मोहब्बत
की
निशानी
अब
फूल
किताबों
में
छुपाया
नहीं
करते
Meharban Amrohvi
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फ़ातिहा
पढ़
कि
फूल
रख
मुझ
पर
आ
गया
है
तो
कुछ
जता
अफ़सोस
Siraj Faisal Khan
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तुझे
भूल
जाने
की
कोशिशें
कभी
कामयाब
न
हो
सकीं
तिरी
याद
शाख़-ए-गुलाब
है
जो
हवा
चली
तो
लचक
गई
Bashir Badr
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जलाने
वाले
जलाते
ही
हैं
चराग़
आख़िर
ये
क्या
कहा
कि
हवा
तेज़
है
ज़माने
की
Jameel Mazhari
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यक़ीन
हो
तो
कोई
रास्ता
निकलता
है
हवा
की
ओट
भी
ले
कर
चराग़
जलता
है
Manzoor Hashmi
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इस
बात
पे
भी
हो
रही
हैरानगी
बहुत
कुछ
मसअलों
ने
यार
का
लहजा
बदल
दिया
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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इन
दयारों
में
जो
भी
बचे
थे
वो
तिरी
बात
में
आ
चुके
थे
क़त्ल
करता
रहा
तू
ही
मुफ़सिद
ख़ून
से
हाथ
मेरे
सने
थे
भर
गया
तू
बहुत
नफ़रतों
से
आज
तेरी
तरफ़
आइने
थे
अब
समझ
आ
रहा
है
दु'आ
में
तुम
मिरी
मौत
क्यूँँ
माँगते
थे
इक
ख़ुदा
आ
गया
है
ज़मीं
पर
इस
क़दर
आसमाँ
घुट
रहे
थे
नाम
आए
न
तेरा
ज़बाँ
पे
बात
ग़ैरों
की
हम
काटते
थे
जो
भी
किरदार
पर
लिख
रहा
हूँ
ये
सभी
हाल
के
तब्सिरे
थे
दास्ताँ
है
हमारी
तुम्हारी
सब
जिसे
सौ
दफ़ा
सुन
चुके
थे
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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जो
सहराओं
की
हालत
पे
यूँँ
हँसते
हैं
उनको
भी
पानी
की
आदत
लग
जाए
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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घरों
में
पुराने
दरीचे
मिलेंगे
वहाँ
से
दिखे
तो
बगीचे
मिलेंगे
हवा
का
हवाला
बताया
गया
है
परिंदे
सलाख़ों
के
पीछे
मिलेंगे
दुबारा
गया
था
वही
राह
पर
तू
कहा
था
कि
आगे
गलीचे
मिलेंगे
सितारों
की
लाशें
छुपाते
रहे
ना
निगाहें
कभी
ये
न
भींचे
मिलेंगे
ख़ुदा
ने
बनाया
सजाया
जहाँ
को
बहाना
बनाया
कि
नीचे
मिलेंगे
सुकूँ
ही
इसी
बात
से
है
कि
मेरे
मिरे
नाम
पर
तीर
खींचे
मिलेंगे
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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मैं
उसके
हर
सहीफे
को
उठा
कर
देख
लेता
हूँ
कि
ग़ज़लों
में
कहीं
मेरा
भी
शायद
ज़िक्र
करता
हो
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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