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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
in dayaaron men jo bhi bache the
in dayaaron men jo bhi bache the | इन दयारों में जो भी बचे थे
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
इन
दयारों
में
जो
भी
बचे
थे
वो
तिरी
बात
में
आ
चुके
थे
क़त्ल
करता
रहा
तू
ही
मुफ़सिद
ख़ून
से
हाथ
मेरे
सने
थे
भर
गया
तू
बहुत
नफ़रतों
से
आज
तेरी
तरफ़
आइने
थे
अब
समझ
आ
रहा
है
दु'आ
में
तुम
मिरी
मौत
क्यूँँ
माँगते
थे
इक
ख़ुदा
आ
गया
है
ज़मीं
पर
इस
क़दर
आसमाँ
घुट
रहे
थे
नाम
आए
न
तेरा
ज़बाँ
पे
बात
ग़ैरों
की
हम
काटते
थे
जो
भी
किरदार
पर
लिख
रहा
हूँ
ये
सभी
हाल
के
तब्सिरे
थे
दास्ताँ
है
हमारी
तुम्हारी
सब
जिसे
सौ
दफ़ा
सुन
चुके
थे
- Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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चल
छोड़
मुनाफ़ों
को
अब
मान
भी
ले
ताजिर
बाज़ार
बता
देगा
कब
दाम
गिराना
है
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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ज़ुल्म
के
क़िस्से
सुनाए
जब
कभी
तफ़्सीर
से
ख़ून
धीरे
से
उतर
आया
मिरी
तस्वीर
से
मैं
ज़मीं
से
यूँँ
लिपट
कर
रो
नहीं
सकता
फ़क़त
आसमाँ
ने
बाँध
रक्खा
है
मुझे
ज़ंजीर
से
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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जब
कभी
तैश
में
कमी
आई
हर
क़सम
फिर
क़सम
रही
आई
रहरव-ए-शौक़
जिस
तरफ़
निकले
मौत
बस
रू-ब-रू
चली
आई
मसअला
तुम
पता
करो
जा
कर
आज
क्यूँँ
आग
में
नमी
आई
सात
ग़म
पास
रख
लिए
गिन
के
ज़िंदगी
याद
ही
नहीं
आई
पूछ
मत
यार
तू
अभी
हम
से
आख़िरी
बार
कब
हँसी
आई
लफ़्ज़
मेरे
लहू
लुहान
हुए
और
आवाज़
भी
दबी
आई
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Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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फ़राग़-ए-दिल
जला
दो
ग़म
बचा
के
रख
हलक़
से
चीख़ना
है,दम
बचा
के
रख
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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मौत
ज़िंदगी
में
ये
वक़्त
बाँट
दूँगा
मैं
बैठ
कर
कभी
दोनों
सब
हिसाब
कर
लेंगे
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
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