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Navneet krishna
kah ga.e the ke aayenge ik din kabhi
kah ga.e the ke aayenge ik din kabhi | कह गए थे के आएँगे इक दिन कभी
- Navneet krishna
कह
गए
थे
के
आएँगे
इक
दिन
कभी
तुम
न
आए
कहे
भी
ज़माना
हुआ
खौफ़
दुनिया
से
इनकार-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा
झूठ-सच्चाइयों
को
बनाना
हुआ
- Navneet krishna
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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जो
सियासत
यहाँ
पे
करते
हैं
देशद्रोही
हैं
देश
पाल
कहाँ
Navneet krishna
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ज़मीं
पे
अगरचे
जवाँ
और
भी
हैं
हमारी
तरह
के
कहाँ
और
भी
हैं
तुम्हारी
नज़र
के
अलावा
भी
हमदम
ज़माने
में
तीर-ओ-कमाँ
और
भी
हैं
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Navneet krishna
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दिल
मेरा
बेक़रार
सा
रहने
लगा
है
अब
सौ
सौ
अज़ाब
क़ल्ब
ये
सहने
लगा
है
अब
Navneet krishna
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
हम
है
दर्द
छुपाने
वाले
तुमको
इक
दिन
आना
होगा
रूठ
के
मुझ
सेे
जाने
वाले
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Navneet krishna
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तारे
नफ़स
पर
उँगली
रख
दी
छेड़
के
तूने
बात
ग़ज़ल
की
नोके
क़लम
से
क़तरा-क़तरा
जारी
हैं
रिशहात
ग़ज़ल
की
Navneet krishna
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