sabki apni chaal alag hai | सबकी अपनी चाल अलग है

  - Naresh Gund
सबकीअपनीचालअलगहै
दुनियाकाभीहालअलगहै
क़िस्मतजैसेकेतैसेहै
दिनवैसेही,सालअलगहै
चेक-मेटराजाकोकरदे
इसप्यादेकीचालअलगहै
पैसोंपरनाचेहरबुलबुल
हरसिक्केकातालअलगहै
गेंडेकीचमड़ीशर्माएँ
इन्सानोंकीखालअलगहै
कुर्सीसेचिपकेबैठेहैं
तशरीफ़ोंपररालअलगहै
गड़बड़घोटालोंकीनगरी
कलियुगहै,यहकालअलगहै
इकथालीकेचट्टे-बट्टे
कालीसबकीदाल,अलगहै
सारेफूलोंकोचूमोतुम
परमेरायेगालअलगहै
मेराजिससेेगलाकटाहै
सचकहताहूँबालअलगहै
ग़ुस्सा,क़ुर्बानी-ओ-चाहत
अपनाअपनालालअलगहै
सबकीनज़रोंमेंनाकारा
माँकोअपनालालअलगहै
  - Naresh Gund
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