dairo-haram se door khada hai anaath ik bacchi sa misra | दैरो-हरम से दूर खड़ा है अनाथ इक बच्ची सा मिस्रा

  - Naresh Gund
दैरो-हरमसेदूरखड़ाहैअनाथइकबच्चीसामिस्रा
उसकोअपनेगोदीलेकरखेलरहामाईसामिस्रा
सबकेइतनेमालिकहैअब,जात-धरममेंबंटेहुएरब
होंठोंपरमेरेजाएकबीर-सा,साई-सामिस्रा
भूख,ग़रीबी,बेकारीको,रुक्नोंमेंमैंनेजोबोया
काग़ज़परमेरेलहराया,गेहूॅंकीबालीसामिस्रा
सबनेअपनीरोटीसेंकी,औरोंकीमुफ़तचिताओंपर
मैंनेभीलफ़्ज़ोंकोगूॅंथा,बेलदियारोटीसामिस्रा
महफ़िलमेंनेताबैठेहैं,ताली-वालीबजारहेहैं
कुत्तोंकीतारीफकरूँॅंगा,डालूॅंगाबोटीसामिस्रा
दिलमेंजोइतनाग़ुस्साहै,दुनियाकीतल्ख़ीजीनेमें
तहज़ीबतोड़करग़ज़लोंकीमैंलिखदूँगालीसामिस्रा
ग़ज़लोंनेपरवाज़भरीजो,छोड़दियाएहसासकापेड़
हाथहिलातेरहजाताहैमानीकेडालीसामिस्रा
  - Naresh Gund
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