chahta tha main jise mujhe vo jab mila nahinus ke baad mere dil ko koi murtaza nahin | चाहता था मैं जिसे मुझे वो जब मिला नहीं

  - Vikas Shah musafir
चाहताथामैंजिसेमुझेवोजबमिलानहीं
उसकेबादमेरेदिलकोकोईमुर्तज़ानहीं
इश्क़मेंयेज़ख़्ममुझकोगरमिलेहोतेतो
आजअपनेघरमेंबैठकरमैंचीख़तानहीं
मैंअगररक़ीबबनगयाहूँआपकातोफिर
आपबद-दुआकरोमेरेलिएदु'आनहीं
इश्क़मेंक़रीबरहनाचाहताथाआपके
मुझकोजोमिलाहैआपसेवोफ़ासलानहीं
बार-बारबे-वफ़ाईकायेदर्दक्यूँसहें
दूररहनामुझसेेइतनामुझमेंहौसलानहीं
हरदफ़ामुझेवोअपनीबेकसीबताताहै
परकभीवोमुझसेमेराहालपूछतानहीं
जानतेहोकिसतरहसेबातकररहेहोतुम
इसतरहकभीविकासकोपुकारनानहीं
  - Vikas Shah musafir
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