muddat se koi shaKHs rula hi nahin paaya | मुद्दत से कोई शख़्स रुला ही नहीं पाया

  - Vikas Shah musafir
मुद्दतसेकोईशख़्सरुलाहीनहींपाया
जलतीहुईआँखोंकोबुझाहीनहींपाया
कहताथाकिता-उम्ररहूँगामैंतेरेसाथ
वैसामुझेऔरकोईमनाहीनहींपाया
मिलताजोवोता-उम्रकावा'दाकरेजाए
इकबारगयाजोकभीहीनहींपाया
गर्दिश-ज़दाहूँचेहरेसेभीलगताहूँमायूस
मुझकोतभीतोकोईबचाहीनहींपाया
हाँआजभीतोशौक़सेकटतीहैमेरीरात
वोक्यूँकिकोईख़्वाबदिखाहीनहींपाया
येलोगकहाकरतेहैंअल्लाहहैतोक्यूँ
क्यूँमुझपेतरसअपनादिखाहीनहींपाया
  - Vikas Shah musafir
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