zaalimon ko gar samajh hoti unhen takhmeen hoti | ज़ालिमों को गर समझ होती उन्हें तख़मीन होती

  - Vikas Shah musafir
ज़ालिमोंकोगरसमझहोतीउन्हेंतख़मीनहोती
फिरकभीदंगेनहींहोतेमजरूहीनहोती
जबबहुतहिम्मतकीमैंनेतबकहींअंजामपाया
दुनियाखाजातीअगरइतनीनितपरवीनहोती
अबनहींचलतीहैदुनियाऐसेतर्ज़-ओ-तौरसेये
अबसभीकेपुरकलाम-ए-तामपरतज़मीनहोती
इतनीशिद्दतसेनिभाईबे-वफ़ाईतूनेजानाँ
गरजुदातुझसेेहोतेतोतेरीतौहीनहोती
मेरेजैसेरिंदऔरऔबाशतेरासज्दाकरते
तोयेउलझीज़िंदगानीआजकोरंगीनहोती
गरपहनइंसानियतकाचोलाचलतेसबयहाँपर
आसमाँमेंउड़तेतोलेकिननक़ायक़तीनहोती
जॉनहालतआपकीमुझकोपताचलहीगईअब
आपकेमिसरेअगरकहताहूँतोतहज़ीनहोती
  - Vikas Shah musafir
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