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Kavi Naman bharat
virah se vikal is hriday ki karaahein
virah se vikal is hriday ki karaahein | विरह से विकल इस हृदय की कराहें
- Kavi Naman bharat
विरह
से
विकल
इस
हृदय
की
कराहें
हमारे
अधूरे
मिलन
और
राहें
तड़प
बस
हमें
तो
रही
है
तुम्हारी
तुम्हारे
सिवा
हम
किसे
और
चाहें
मुलाक़ात
तुम
सेे
नहीं
हो
रही
है
मुझे
याद
आती
तुम्हारी
निगाहें
यही
बात
हमको
रुलाती
रही
है
नए
साजना
अब
नई
और
बाहें
- Kavi Naman bharat
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जिसने
बेचैनियाँ
दी
हैं
मुझे
बेचैन
रहे
मैंने
रो-रो
के
ख़ुदास
ये
दु'आ
माँगी
है
Shajar Abbas
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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अब
शहर
की
थकावट
बेचैन
कर
रही
है
अब
शाम
हो
गई
है
चल
माँ
से
बात
कर
लें
Akash Rajpoot
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बेचैन
फिरता
हूँ
मैं
अक्सर
ख़्वाब
में
होती
नहीं
आबाद
मेरी
नींद
भी
Piyush Mishra 'Aab'
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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कोई
मेरे
दिल
से
पूछे
तिरे
तीर-ए-नीम-कश
को
ये
ख़लिश
कहाँ
से
होती
जो
जिगर
के
पार
होता
Mirza Ghalib
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बड़ी
जल्दी
में
था
उस
दिन
ज़रा
बेचैन
भी
था
वो
उसे
कहना
था
कुछ
मुझ
सेे
मगर
वो
कह
नहीं
पाया
Varun Anand
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उसको
नंबर
देके
मेरी
और
उलझन
बढ़
गई
फोन
की
घंटी
बजी
और
दिल
की
धड़कन
बढ़
गई
Ana Qasmi
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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कोई
दीवाना
कहता
है
कोई
पागल
समझता
है
मगर
धरती
की
बेचैनी
को
बस
बादल
समझता
है
Kumar Vishwas
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इक
अधूरे
सपन
का
न
पाना
हुआ
आँसुओं
का
बहुत
पर
कमाना
हुआ
प्रेम
को
खोजते
खोजते
खो
गए
प्रेम
की
खोज
में
प्रेम
जाना
हुआ
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Kavi Naman bharat
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सुनी
बात
जग
की,तो
ऐसा
हुआ
फिर,
जले
जल
में
रघुवर,सिया
के
विरह
में
Kavi Naman bharat
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नज़र
का
नज़र
को
भुलाना
वही
है
नज़र
का
अभी
पर
चुराना
वही
है
तुम्हें
प्यार
करना,विरह
को
बुलावा
विरह
से
स्वयं
को
कमाना
वही
है
अलग
जो
हुए
हम
न
हम
हैं
रहे
हम
दिवानी
मगर
ये
दिवाना
वही
है
भले
ही
भुलाना
कदम
है
तुम्हारा
मगर
प्यार
मेरा
पुराना
वही
है
मुझे
सब
तुम्हारा
सदा
पूछते
हैं
अभी
तक
तुम्हें
पर
छुपाना
वही
है
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Kavi Naman bharat
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राह
उन
सेे
हमारी
अलग
यूँँ
रही
साथ
चलकर
कभी
हम
मिले
ही
नहीं
Kavi Naman bharat
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भोर
की
तो
प्रतीक्षा
करे
रात
है,
बाद
उसके
नई
इक
मुलाक़ात
है
पास
आना
हमारा
अधूरा
अभी,
दूर
जाना
बहुत
दूर
की
बात
है
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