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Moid Rahbar
az rahe sukhun jab bhi qalam meraa utha hai
az rahe sukhun jab bhi qalam meraa utha hai | अज़ राहे सुख़न जब भी क़लम मेरा उठा है
- Moid Rahbar
अज़
राहे
सुख़न
जब
भी
क़लम
मेरा
उठा
है
अफ़्कार
की
दुनिया
का
नया
बाब
खुला
है
सच्चाई
तो
ये
है
कि
अभी
मुझ
सेा
क़लमकार
लफ़्ज़ों
को
बरतने
का
हुनर
सीख
रहा
है
- Moid Rahbar
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बिछड़
गया
हूँ
मगर
याद
करता
रहता
हूँ
किताब
छोड़
चुका
हूँ
पढ़ाई
जारी
है
Ali Zaryoun
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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बस
यही
इक
हुनर
सीखना
है
मुझे
वो
मिरी
चुप्पी
कैसे
पढ़ा
करती
है
Harsh saxena
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उतारा
दिल
के
वरक़
पर
तो
कितना
पछताया
वो
इंतिसाब
जो
पहले
बस
इक
किताब
पे
था
Aanis Moin
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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ये
हुनर
रब
ने
मेरी
ज़ात
में
रक्खा
हुआ
है
अच्छे
अच्छो
को
भी
औक़ात
में
रक्खा
हुआ
है
Fareeha Naqvi
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ख़ुद
को
मनवाने
का
मुझको
भी
हुनर
आता
है
मैं
वो
कतरा
हूँ
समुंदर
मेरे
घर
आता
है
Waseem Barelvi
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सिर्फ़
तालीम
है
वो
शय
यारों
जिस
सेे
ज़िंदा
चराग़
जलते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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ये
उस
सेे
रब्त-ओ-ज़ब्त
बढ़ाने
का
है
सिला
उसकी
ख़ता
को
मेरी
ख़ता
मानते
हैं
लोग
Moid Rahbar
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शुमार
अपना
भी
हो
जाए
अदब
के
नाम
चीनों
में
ख़ुदा
कुछ
शे'र
कहला
दे
अगर
मुश्किल
ज़मीनों
में
मैं
फ़न्न-ए-शा'इरी
पर
इसलिए
क़ुर्बान
हूँ
रहबर
नहीं
मिलता
ये
गौहर
बादशाहों
के
ख़ज़ीनों
में
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Moid Rahbar
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इश्क़
ऐसा
है
पाकीज़गी
के
बग़ैर
शा'इरी
जैसे
हर्फ़-ए-रवी
के
बग़ैर
Moid Rahbar
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इक
मिसाली
शे'र
भी
मैं
कह
न
पाया
आज
तक
इसलिए
जाना
है
मुझको
फ़िक्र
की
मेराज
तक
Moid Rahbar
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अंजाम
ए
हिज्र
क्या
है
ये
तुम
ख़ुद
ही
देख
लो
हम
इन्तिज़ार
यार
में
पत्थर
के
हो
गए
Moid Rahbar
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