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Moid Rahbar
anjaam ae hijr kya hai ye tum KHud hi dekh lo
anjaam ae hijr kya hai ye tum KHud hi dekh lo | अंजाम ए हिज्र क्या है ये तुम ख़ुद ही देख लो
- Moid Rahbar
अंजाम
ए
हिज्र
क्या
है
ये
तुम
ख़ुद
ही
देख
लो
हम
इन्तिज़ार
यार
में
पत्थर
के
हो
गए
- Moid Rahbar
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न
हुआ
नसीब
क़रार-ए-जाँ
हवस-ए-क़रार
भी
अब
नहीं
तिरा
इंतिज़ार
बहुत
किया
तिरा
इंतिज़ार
भी
अब
नहीं
तुझे
क्या
ख़बर
मह-ओ-साल
ने
हमें
कैसे
ज़ख़्म
दिए
यहाँ
तिरी
यादगार
थी
इक
ख़लिश
तिरी
यादगार
भी
अब
नहीं
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Jaun Elia
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अब
जो
पत्थर
है
आदमी
था
कभी
इस
को
कहते
हैं
इंतिज़ार
मियाँ
Afzal Khan
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शब-ए-इंतिज़ार
की
कश्मकश
में
न
पूछ
कैसे
सहर
हुई
कभी
इक
चराग़
जला
दिया
कभी
इक
चराग़
बुझा
दिया
Majrooh Sultanpuri
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तिरी
सदा
का
है
सदियों
से
इंतिज़ार
मुझे
मिरे
लहू
के
समुंदर
ज़रा
पुकार
मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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वो
न
आएगा
हमें
मालूम
था
इस
शाम
भी
इंतिज़ार
उस
का
मगर
कुछ
सोचकर
करते
रहे
Parveen Shakir
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ग़ज़ब
किया
तिरे
वअ'दे
पे
ए'तिबार
किया
तमाम
रात
क़यामत
का
इंतिज़ार
किया
Dagh Dehlvi
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रात
का
इंतिज़ार
कौन
करे
आज
कल
दिन
में
क्या
नहीं
होता
Bashir Badr
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कोई
आया
न
आएगा
लेकिन
क्या
करें
गर
न
इंतिज़ार
करें
Firaq Gorakhpuri
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उस
वक़्त
इंतिज़ार
का
आलम
न
पूछिए
जब
कोई
बार
बार
कहे
आ
रहा
हूँ
मैं
Unknown
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रूह
मेरी
अब
करेगी
इंतिज़ार
क़ब्र
में
ये
फ़ोन
भी
रख
दीजिए
Tanoj Dadhich
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रब्त
इक़बाल
से
मेरा
है
न
है
मीर
के
साथ
हाज़िर-ए-बज़्म
हूँ
मैं
अपनी
ही
तहरीर
के
साथ
Moid Rahbar
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ये
उस
सेे
रब्त-ओ-ज़ब्त
बढ़ाने
का
है
सिला
उसकी
ख़ता
को
मेरी
ख़ता
मानते
हैं
लोग
Moid Rahbar
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इश्क़
ऐसा
है
पाकीज़गी
के
बग़ैर
शा'इरी
जैसे
हर्फ़-ए-रवी
के
बग़ैर
Moid Rahbar
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अज़
राहे
सुख़न
जब
भी
क़लम
मेरा
उठा
है
अफ़्कार
की
दुनिया
का
नया
बाब
खुला
है
सच्चाई
तो
ये
है
कि
अभी
मुझ
सेा
क़लमकार
लफ़्ज़ों
को
बरतने
का
हुनर
सीख
रहा
है
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Moid Rahbar
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शुमार
अपना
भी
हो
जाए
अदब
के
नाम
चीनों
में
ख़ुदा
कुछ
शे'र
कहला
दे
अगर
मुश्किल
ज़मीनों
में
मैं
फ़न्न-ए-शा'इरी
पर
इसलिए
क़ुर्बान
हूँ
रहबर
नहीं
मिलता
ये
गौहर
बादशाहों
के
ख़ज़ीनों
में
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Moid Rahbar
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