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Mohit Subran
vahii baatein unhen lagne lagii hain shool ke jaisi
vahii baatein unhen lagne lagii hain shool ke jaisi | वही बातें उन्हें लगने लगी हैं शूल के जैसी
- Mohit Subran
वही
बातें
उन्हें
लगने
लगी
हैं
शूल
के
जैसी
वही
बातें,
जो
उन
को
इब्तिदा
में
फूल
लगती
थीं
- Mohit Subran
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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फोन
भी
आया
तो
शिकवे
के
लिए
फूल
भी
भेजा
तो
मुरझाया
हुआ
रास्ते
की
मुश्किलें
तो
जान
लूँ
आता
होगा
उसका
ठुकराया
हुआ
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Balmohan Pandey
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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साथ
चलते
जा
रहे
हैं
पास
आ
सकते
नहीं
इक
नदी
के
दो
किनारों
को
मिला
सकते
नहीं
उसकी
भी
मजबूरियाँ
हैं
मेरी
भी
मजबूरियाँ
रोज़
मिलते
हैं
मगर
घर
में
बता
सकते
नहीं
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Bashir Badr
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कोई
तितली
पकड़
लें
अगर
फूल
पर
रख
दिया
कीजिए
Vikas Rana
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पूरी
कायनात
में
एक
क़ातिल
बीमारी
की
हवा
हो
गई
वक़्त
ने
कैसा
सितम
ढाया
कि
दूरियाँ
ही
दवा
हो
गईं
Unknown
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ईद
पर
सब
फूल
लेकर
आ
रहे
हैं
हो
गए
हैं
ज़िंदगी
के
ख़त्म
रमज़ान
Aves Sayyad
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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किस
को
हैं
फ़ुर्सतें
कि
किसी
की
ख़ुशी
चुभे
सब
अपने-अपने
दुख
में
ही
मसरूफ़
हैं
यहाँ
Mohit Subran
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शे'र
कहना
है
वो
फ़न
जो
जान-ए-मन
आसाँ
नहीं
'जौन'
ने
जब
ख़ून
थूका
तब
कहीं
ग़ज़लें
हुईं
Mohit Subran
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सफ़र
कैसे
कटा
उन
रास्तों
को
कौन
गिनता
है
तुम्हारे
सर
पे
बीते
हादसों
को
कौन
गिनता
है
सभी
रखते
हैं
गिन
के
उँगलियों
पर
कामयाबी
को
उठाई
हैं
जो
तुमने
मुश्किलों
को
कौन
गिनता
है
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Mohit Subran
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पगड़ियों
तक
को
नहीं
छोड़ा
भला
सर
पे
हमारे
आँधियाँ
सब
कुछ
उड़ा
कर
ले
गईं
घर
से
हमारे
Mohit Subran
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जिसे
मैं
जानता
हूँ
पहले
से
उस
से
नहीं
जुड़ना
नए
रस्ते
का
तालिब
हूँ
पुराने
पे
नहीं
मुड़ना
Mohit Subran
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