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Mohit Subran
tumhein to khush-numa khush-rang hai har ek mausam hi
tumhein to khush-numa khush-rang hai har ek mausam hi | तुम्हें तो ख़ुश-नुमा ख़ुश-रंग है हर एक मौसम ही
- Mohit Subran
तुम्हें
तो
ख़ुश-नुमा
ख़ुश-रंग
है
हर
एक
मौसम
ही
मगर
फ़ुटपाथ
के
लोगों
पे
हर
मौसम
मुसीबत
है
- Mohit Subran
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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यहाँ
तुम
देखना
रुतबा
हमारा
हमारी
रेत
है
दरिया
हमारा
Kushal Dauneria
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करती
है
तो
करने
दे
हवाओं
को
शरारत
मौसम
का
तकाज़ा
है
कि
बालों
को
खुला
छोड़
Abrar Kashif
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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मैं
आख़िर
कौन
सा
मौसम
तुम्हारे
नाम
कर
देता
यहाँ
हर
एक
मौसम
को
गुज़र
जाने
की
जल्दी
थी
Rahat Indori
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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लब-ए-दरिया
पे
देख
आ
कर
तमाशा
आज
होली
का
भँवर
काले
के
दफ़
बाजे
है
मौज
ऐ
यार
पानी
में
Shah Naseer
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नए
साल
में
पिछली
नफ़रत
भुला
दें
चलो
अपनी
दुनिया
को
जन्नत
बना
दें
Unknown
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एक
ही
तो
दुख
है
मुझ
को
और
मेरा
दुख
है
ये
साँस
का
जो
सिलसिला
है
हाए
रुकता
क्यूँ
नहीं
Mohit Subran
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आख़िरश
कोई
इशारा
किसी
को
क्यूँ
देंगे
जब
न
सह
पाएँगे
चुप-चाप
चले
जाएँगे
Mohit Subran
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लगाने
को
नया
इल्ज़ाम
कोई
पुरानी
चैट
पलटी
जा
रही
है
Mohit Subran
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बग़ावत
न
कर
तू
अदावत
न
कर
तू
बुरा
आदमी
है
वकालत
न
कर
तू
पिए
जा
घुटन
ये
शिकायत
न
कर
तू
मुयस्सर
हुए
पे
नदामत
न
कर
तू
वबा
का
समय
है
तिजारत
न
कर
तू
भरे
ज़ख़्म
पे
अब
सियासत
न
कर
तू
ये
गुंडे
हैं
इनकी
इबादत
न
कर
तू
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Mohit Subran
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सितारे
जब
तिरे
सब
डूब
जाएँगे
किसी
इक
दिन
अभी
हैं
साथ
जो
भी
ऊब
जाएँगे
किसी
इक
दिन
नहीं
तुझ
पे
हैं
तेरी
दौलत-ओ-शोहरत
पे
हैं
माइल
तुझे
सब
छोड़
ये
मर्ग़ूब
जाएँगे
किसी
इक
दिन
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Mohit Subran
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