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Mohit Subran
lagaane ko naya ilzaam koii
lagaane ko naya ilzaam koii | लगाने को नया इल्ज़ाम कोई
- Mohit Subran
लगाने
को
नया
इल्ज़ाम
कोई
पुरानी
चैट
पलटी
जा
रही
है
- Mohit Subran
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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आ
रही
है
जो
बहू
सीधी
रहे
माँ
चाहती
जा
रही
बेटी
मगर
चालाक
होनी
चाहिए
Tanoj Dadhich
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है
तबाही
वो
क़ुर्ब
में
मेरे
जो
है
रहता
तबाह
रहता
है
Mohit Subran
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आग़ाज़
तो
अच्छा
नहीं
है
इस
कहानी
का
मगर
ये
देखना
दिलचस्प
होगा
अंत
क्या
होगा
भला
Mohit Subran
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अच्छी
नहीं
हुई
जो
शुरुआत
क्या
हुआ
उम्मीद
रख
उमीद
पे
दुनिया-जहान
है
Mohit Subran
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पगड़ियों
तक
को
नहीं
छोड़ा
भला
सर
पे
हमारे
आँधियाँ
सब
कुछ
उड़ा
कर
ले
गईं
घर
से
हमारे
Mohit Subran
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हाँ
मेरे
साथ
कई
नफ़्सियाती
मसअले
हैं
तमाम
ज़हनी
मसाइल
से
जूझता
हूँ
मैं
ये
ज़ेहन
मेरा
न
मुझ
को
कहीं
निगल
बैठे
मुझे
बचाओ
रफ़ीक़ो
कि
डूबता
हूँ
मैं
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Mohit Subran
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