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Mohit Subran
mohazzab lehje ki mohit vahaañ ummeed kya karna
mohazzab lehje ki mohit vahaañ ummeed kya karna | मोहज़्ज़ब लहजे की 'मोहित' वहाँ उम्मीद क्या करना
- Mohit Subran
मोहज़्ज़ब
लहजे
की
'मोहित'
वहाँ
उम्मीद
क्या
करना
जहाँ
हर
शख़्स
के
होंठों
से
पैहम
गाली
झड़ती
हों
- Mohit Subran
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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उस
गली
ने
ये
सुन
के
सब्र
किया
जाने
वाले
यहाँ
के
थे
ही
नहीं
Jaun Elia
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इस
दुनिया
के
कहने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
पत्थर
रख
लो
सीने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
Vishal Singh Tabish
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तू
मुझे
छोड़
के
ठुकरा
के
भी
जा
सकती
है
तेरे
हाथों
में
मेरे
हाथ
हैं
ज़ंजीर
नहीं
Sahir Ludhianvi
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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किसी
पे
करना
नहीं
ए'तिबार
मेरी
तरह
लुटा
के
बैठोगे
सब्र-ओ-क़रार
मेरी
तरह
Fareed Parbati
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सहने
वाले
को
गर
सब्र
आ
जाए
तो
फिर
समझो
कहने
वालों
की
औक़ात
फ़क़त
दो
कौड़ी
की
है
A R Sahil "Aleeg"
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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करवट-करवट
बढ़ते-बढ़ते
नींद
की
सीढ़ी
चढ़ते-चढ़ते
थक
कर
आख़िर
सो
जाता
हूँ
मैं
बिस्तर
से
लड़ते-लड़ते
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Mohit Subran
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झुका
के
सर
अदब
से
सुन
रहा
हूँ
इन
की
बक-बक
उठा
के
सर
कि
अब
बतला
ही
दूँ
क्या
कौन
हूँ
मैं
Mohit Subran
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जा
चुका
है
बता
के
वो
अपना
रह
गया
बाक़ी
हिस्सा
हमारा
और
हम
कुछ
नहीं
चाहते
हैं
कोई
बस
सुन
ले
क़िस्सा
हमारा
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Mohit Subran
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ये
बात
भूलें
न
नेता
कि
आम
लोगों
ने
जभी
है
चाही
जो
सरकार
वो
गिरा
डाली
Mohit Subran
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देखे
हैं
तेरे
जल्वे
भी
लेकिन
हम
तेरी
सादगी
पे
मरते
हैं
Mohit Subran
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