udaasiyon ne labon par nigaah kya daali | उदासियों ने लबों पर निगाह क्या डाली

  - Mohit Subran
उदासियोंनेलबोंपरनिगाहक्याडाली
जोएकफूलसीमुस्कानथीबुझाडाली
नहींहैहाथकिसीग़ैरकामिटानेमें
ख़ुदअपनीज़िन्दगीख़ुदमैंनेहीमिटाडाली
सहेजीपर्समेंतस्वीरइकबहुतदिनतक
फिरएकरातवोतस्वीरभीजलाडाली
बहुतग़ुरूरथाजिसदोस्तपेमुझेअपने
उसीनेहाएकिऔक़ातफिरदिखाडाली
जगहमिलीहीनहींमेरेदिलकोउसदिलमें
मैंनेकौनसीतरकीबआज़माडाली
  - Mohit Subran
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