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Mohammed Ibrahim
mujhse din raat ye aaina
mujhse din raat ye aaina | मुझ सेे दिन रात ये आईना
- Mohammed Ibrahim
मुझ
सेे
दिन
रात
ये
आईना
कर
रहा
बात
ये
आईना
टूट
ही
जाएँगे
लोग
वो
जिन
की
है
ज़ात
ये
आईना
जब
हँसू
तो
हँसे
साथ
ये
रोए
भी
साथ
ये
आईना
भूल
जो
जाऊँ
तो
सामने
लाए
औक़ात
ये
आईना
- Mohammed Ibrahim
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ये
कहाँ
की
रीत
है
जागे
कोई
सोए
कोई
रात
सब
की
है
तो
सब
को
नींद
आनी
चाहिए
Madan Mohan Danish
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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सौ
चाँद
भी
चमकेंगे
तो
क्या
बात
बनेगी
तुम
आए
तो
इस
रात
की
औक़ात
बनेगी
Dagh Dehlvi
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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सखी
को
हमारी
नज़र
लग
न
जाए
उसे
ख़्वाब
में
रात
भर
देखते
हैं
Sahil Verma
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रात
सोने
के
लिए
दिन
काम
करने
के
लिए
वक़्त
मिलता
ही
नहीं
आराम
करने
के
लिए
Jamal Ehsani
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थोड़ा
सा
अक्स
चाँद
के
पैकर
में
डाल
दे
तू
आ
के
जान
रात
के
मंज़र
में
डाल
दे
Kaif Bhopali
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जब
चली
ठंडी
हवा
बच्चा
ठिठुर
कर
रह
गया
माँ
ने
अपने
ला'ल
की
तख़्ती
जला
दी
रात
को
Sibt Ali Saba
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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अब
वो
पहली
सी
शिद्दत
नहीं
है
इश्क़
में
वो
तमाज़त
नहीं
है
ऐसे
जैसे
कि
दम
घुट
रहा
है
साँस
लेने
की
फ़ुर्सत
नहीं
है
कल
तलक
था
वो
जब
साथ
थे
हम
अब
से
वो
ख़ूब-सूरत
नहीं
है
माँग
कर
जो
मिले
है
'मुहम्मद'
वो
मुहब्बत
मुहब्बत
नहीं
है
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Mohammed Ibrahim
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कि
हम
तुम
और
ये
बहरें
भी
क़ातिल
हैं
कि
हमने
क़त्ल
कर
डाला
ख़यालों
का
ग़ज़ल
बस
आज
होती
है
मुहब्बत
पर
ग़ज़ल
तो
एक
मैदाँ
था
सवालों
का
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Mohammed Ibrahim
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दोस्त
इक
हर
दफ़ा
होता
है
देख
लूँ
हौसला
होता
है
पेड़
से
ही
हों
क्यूँ
राहतें
ज़ख़्म
भी
तो
घना
होता
है
देख
लेता
हूँ
बाबा
को
मैं
पस्त
जब
हौसला
होता
है
हम
चले
आप
को
छोड़
के
फ़ैसला
फ़ैसला
होता
है
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Mohammed Ibrahim
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गए
लोग
लेकिन
निशानी
रहेगी
तेरे
बाद
भी
ये
कहानी
रहेगी
मैं
तन्हा
सही
पर
यक़ीं
ये
है
मुझको
तिरी
दी
हुई
इक
निशानी
रहेगी
न
पूछो
मेरे
दिल
का
आलम
है
क्या
अब
तेरी
याद
ही
मेहरबानी
रहेगी
कभी
तुम
जो
आओ
तो
देखोगे
शायद
कि
आँखों
में
अब
भी
रवानी
रहेगी
जुदाई
के
मौसम
लिखे
है
जो
उन
में
तेरे
नाम
भी
इक
कहानी
रहेगी
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Mohammed Ibrahim
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हवा
चल
रही
है
फ़ज़ा
कुछ
कहेगी
उदासी
हमारी
सदा
कुछ
कहेगी
न
बोले
कोई
और
आँखें
भी
ख़ामोश
मगर
ख़ामुशी
की
सदा
कुछ
कहेगी
तुम्हें
सोचते
ही
निकलती
है
आहट
मोहब्बत
की
ये
इंतिहा
कुछ
कहेगी
बिछड़ने
का
लम्हा
है
पत्थर
सा
लेकिन
यही
बेबसी
ये
दु'आ
कुछ
कहेगी
मैं
तन्हा
सही
पर
यक़ीं
है
मुझे
ये
तेरी
याद
मुझ
सेे
वफ़ा
कुछ
कहेगी
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Mohammed Ibrahim
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