hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Mohammed Ibrahim
ki ham tum aur ye bahren bhi qaateel hain
ki ham tum aur ye bahren bhi qaateel hain | कि हम तुम और ये बहरें भी क़ातिल हैं
- Mohammed Ibrahim
कि
हम
तुम
और
ये
बहरें
भी
क़ातिल
हैं
कि
हमने
क़त्ल
कर
डाला
ख़यालों
का
ग़ज़ल
बस
आज
होती
है
मुहब्बत
पर
ग़ज़ल
तो
एक
मैदाँ
था
सवालों
का
- Mohammed Ibrahim
Download Sher Image
मुहब्बत
आपसे
करना
कभी
आसाँ
नहीं
था
पर
बिना
कश्ती
के
दरिया
पार
करना
शौक़
है
मेरा
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
31 Likes
मुहब्बत
रतजगे
आवारागर्दी
ज़रूरी
काम
सारे
हो
रहे
हैं
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
41 Likes
मोहब्बत
के
इक़रार
से
शर्म
कब
तक
कभी
सामना
हो
तो
मजबूर
कर
दूँ
Akhtar Shirani
Send
Download Image
25 Likes
ये
कहना
था
उन
से
मोहब्बत
है
मुझ
को
ये
कहने
में
मुझ
को
ज़माने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
Send
Download Image
100 Likes
लिखी
होगी
मोहब्बत
जिन
सफ़ों
पर
मेरा
दावा
है
वो
नम
ही
मिलेंगे
किसी
दिन
ऊब
जाओगे
सभी
से
तुम्हें
उस
रोज़
फिर
हम
ही
मिलेंगे
Read Full
Ritesh Rajwada
Send
Download Image
43 Likes
मुहब्बत
के
समुंदर
की
कलाकारी
ग़ज़ब
की
है
कि
सब
कुछ
डूब
जाता
है
मगर
तर
कुछ
नहीं
होता
Muntazir Firozabadi
Send
Download Image
1 Like
अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
63 Likes
अब
मैं
क्या
अपनी
मोहब्बत
का
भरम
भी
न
रखूँ
मान
लेता
हूँ
कि
उस
शख़्स
में
था
कुछ
भी
नहीं
Jawwad Sheikh
Send
Download Image
57 Likes
दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
Send
Download Image
26 Likes
मुहब्बत
रास
आ
जाए
हमें
ये
सोचकर
हम
ने
जिसे
भी
चाहा
है
पहली
मुहब्बत
की
तरह
चाहा
Prashant Rao chourase
Send
Download Image
27 Likes
Read More
कहाँ
ढूँढते
हो
मुझे
इस
जहाँ
में
मैं
खोया
हूँ
ख़ुद
की
ही
इक
दास्ताँ
में
जो
ख़्वाबों
से
निकला
हक़ीक़त
को
देखा
मिरे
पास
कुछ
भी
न
था
इस
जहाँ
में
कोई
पूछ
बैठे
तो
क्या
हाल
लिख
दूँ
बस
इक
चुप
है
लिपटी
हुई
दास्ताँ
में
कभी
अश्क
बन
कर
बहा
ख़ुद
से
बाहर
कभी
क़ैद
था
मैं
ही
अपनी
अज़ाँ
में
Read Full
Mohammed Ibrahim
Download Image
0 Likes
आज
भी
हम
सोचते
हैं
कल
के
वो
ग़म
सोचते
हैं
तुम
नहीं
गर
सोचते
तो
तुम
को
क्यूँ
हम
सोचते
हैं
हमने
सोचा
आप
हरदम
हम
को
हमदम
सोचते
हैं
हमने
सोचा
तुमको
हमदम
और
हरदम
सोचते
हैं
चीखती
है
आँख
तुमको
हम
तो
मुबहम
सोचते
हैं
आप
भी
सोचो
हमारा
आप
का
हम
सोचते
हैं
Read Full
Mohammed Ibrahim
Download Image
0 Likes
गर्म
सूरज
पस्त
जब
भी
हौसला
कर
मौत
है
या
ज़िंदगी
है
फ़ैसला
कर
Mohammed Ibrahim
Send
Download Image
1 Like
तू
हमारा
है
गुमाँ
भी
छोड़
देंगे
बाद
उसके
ये
जहाँ
भी
छोड़
देंगे
है
मोहब्बत
क़ैद
कोई
ये
नहीं
सो
वो
कहे
छोड़ो
जहाँ
भी
छोड़
देंगे
लौट
आओ
तुम
कभी
तो
इसलिए
हम
पैरों
के
अपने
निशाँ
भी
छोड़
देंगे
Read Full
Mohammed Ibrahim
Download Image
0 Likes
उस
के
चेहरे
पे
जो
तिल
है
वो
सितारा
सा
लगे
एक
लम्हा
रुक
के
देखो
चाँद
सारा
सा
लगे
हुस्न
जब
पर्दा
उठाए
धड़कनें
मदहोश
हों
हर
अदा
उस
की
मुझे
अब
इक
नज़ारा
सा
लगे
शहर
की
गलियों
में
जब
आईना
बन
कर
वो
चले
हर
नज़र
उस
पर
ठहर
कर
बेकरारा
सा
लगे
मेरे
अफ़्साने
में
शामिल
है
जो
उसका
तिल
ही
है
उस
के
होंठों
का
तबस्सुम
राज़दारा
सा
लगे
Read Full
Mohammed Ibrahim
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Aitbaar Shayari
Gussa Shayari
Allahabad Shayari
Maut Shayari
Kitab Shayari