मेरे कमरे में बेश्तर तुम थे

  - MIR SHAHRYAAR
मेरेकमरेमेंबेश्तरतुमथे
मैंनहींथायहाँमगरतुमथे
सारेचेहरोंमेंसर-ब-सरतुमथे
मैंजहाँभीगयाउधरतुमथे
फ़िक्र-ए-मंज़िलमुझेसतातीक्यूँँ
राहबरमेरेहमसेफ़रतुमथे
वोपरिंदाफिरउड़तातोकैसे
उसपरिंदेकेबाल-ओ-परतुमथे
शहर-ए-दिलकीउदासगलियोंमें
मेरेहमराहदर-ब-दरतुमथे
इसभरेदश्तमेंशजरतुमथे
बे-घरोंकाबसएकघरतुमथे
मेरेवहशतभरेदिनोंकाशम्स
मेरीनमरातोंकाक़मरतुमथे
निकलूँतोकैसेनिकलूँबाहरअब
इसहिसार-ए-अलमकादरतुमथे
मैंसभीहालतोंसेथाला-इल्म
मेरेहोनेकीतोख़बरतुमथे
दोक़दमसाथहमचलेथेमगर
हमसेफ़रमेरेउम्रभरतुमथे
रौशनीहोनेपरतोयेमैंहूँ
साथमेरेतोरातभरतुमथे
  - MIR SHAHRYAAR
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