आए दिन उन सेे मुलाक़ात हुआ करती थी

  - MIR SHAHRYAAR
आएदिनउनसेेमुलाक़ातहुआकरतीथी
फ़ोनपरबातभीदिन-रातहुआकरतीथी
अबतोसमझानेसेभीबातसमझतीनहींवो
आँखोंहीआँखोंमेंजोबातहुआकरतीथी
चलतेचलतेयूँँहीझेलमकेकिनारेबैठे
हाथोंमेंहाथलिएरातहुआकरतीथी
शायदअबउसकाकहींनाम-ओ-निशाँबाक़ीनहीं
जिसकेहोनेसेमेरीरातहुआकरतीथी
अबतोउसलड़कीकीयादेंभीनहींमेरेसाथ
लम्हालम्हाजोमेरेसाथहुआकरतीथी
अबकहींमिलताहैतोअजनबीसालगताहै
पहलेतोऔरहीकुछबातहुआकरतीथी
आलम-ए-नीस्तीमेंगुममैंयेभीभूलगया
मैंथामेरीभीकोईज़ातहुआकरतीथी
गुज़रेवक़्तोंमेंकिसीदुनियाकासूरजरहाहूँ
कहकशाँमेरीमेरेसाथहुआकरतीथी
मेरेगाँवमेंभीउगतीथीमोहब्बतकीफ़स्ल
मेरेगाँवमेंभीबरसातहुआकरतीथी
कभीइनटूटेछतोंपरभीनिकलताथाचाँद
हमग़रीबोंपेभीसौग़ातहुआकरतीथी
  - MIR SHAHRYAAR
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