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Manoj Devdutt
meraa jab bhi kafan niklega
meraa jab bhi kafan niklega | मेरा जब भी कफ़न निकलेगा
- Manoj Devdutt
मेरा
जब
भी
कफ़न
निकलेगा
तभी
मुझ
सेे
वतन
निकलेगा
- Manoj Devdutt
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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ये
सोचके
तो
दूसरी
कोई
मिट्टी
को
छु'आ
नहीं
के
बाद
मरने
के
हिन्दुस्तां
में
दफनाया
जाऊंगा
karan singh rajput
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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हम
अपनी
जान
के
दुश्मन
को
अपनी
जान
कहते
हैं
मोहब्बत
की
इसी
मिट्टी
को
हिंदुस्तान
कहते
हैं
Rahat Indori
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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दिल
से
निकलेगी
न
मर
कर
भी
वतन
की
उल्फ़त
मेरी
मिट्टी
से
भी
ख़ुशबू-ए-वफ़ा
आएगी
Lal Chand Falak
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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सभी
का
ख़ून
है
शामिल
यहाँ
की
मिट्टी
में
किसी
के
बाप
का
हिन्दुस्तान
थोड़ी
है
Rahat Indori
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वतन
की
ख़ाक
ज़रा
एड़ियाँ
रगड़ने
दे
मुझे
यक़ीन
है
पानी
यहीं
से
निकलेगा
Unknown
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दिल
और
जान
से
नहीं
गया
फिर
इस
मकान
से
नहीं
गया
अब
वो
नज़र
मिला
नहीं
रहा
यानी
कि
शान
से
नहीं
गया
कुंडल
उतार
तो
दिया
गया
पर
छेद
कान
से
नहीं
गया
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Manoj Devdutt
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बारिश
हुई
है
धूप
में
कोई
ख़ुशी
में
रोया
है
Manoj Devdutt
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जो
पार
हद
को
कर
गए
हैं
अब
ज़िन्दा
नहीं
हैं
मर
गए
हैं
अब
सब
रात
को
घर
ही
गए
थे
पर
तारे
सवेरे
घर
गए
हैं
अब
अब
आग
जिसने
भी
लगाई
थी
जल
उनके
भी
तो
घर
गए
हैं
अब
दौलत
नहीं
तो
क्या
हुआ
शायर
पन्ने
बहुत-से
भर
गए
हैं
अब
सच
बोलने
निकला
कोई
भी
जब
नेता
सभी
फिर
डर
गए
हैं
अब
अब
प्यार
करना
था
नहीं
हमको
पर
प्यार
तो
हम
कर
गए
हैं
अब
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Manoj Devdutt
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गुलाबी
होंठ
काले
हो
गए
उसके
वो
अब
सिगरेट
भी
पीने
लगी
है
क्या
Manoj Devdutt
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दुखों
के
शजर
ही
मिलेंगे
सुख़न-वर
के
घर
ही
मिलेंगे
ठिकाना
न
'आशिक़
का
पूछो
ये
तो
दर-बदर
ही
मिलेंगे
कभी
भी
कहीं
तू
चली
जा
तुझे
हम
इधर
ही
मिलेंगे
सुख़न-वर
जो
अच्छे
हुए
हैं
यहाँ
बे-क़दर
ही
मिलेंगे
हुए
बे-वफ़ा
जो
यहाँ
पर
चुराते
नज़र
ही
मिलेंगे
अभी
प्यार
में
जो
पड़े
हैं
वो
तो
बेख़बर
ही
मिलेंगे
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Manoj Devdutt
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