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Manoj Devdutt
ab zindagi jeena nahin chhod saka
ab zindagi jeena nahin chhod saka | अब ज़िंदगी जीना नहीं छोड़ सकता
- Manoj Devdutt
अब
ज़िंदगी
जीना
नहीं
छोड़
सकता
बस
इसलिए
पीना
नहीं
छोड़
सकता
छत
पर
रहा
करती
है
हर
शाम
को
वो
कमरा
रखो
ज़ीना
नहीं
छोड़
सकता
- Manoj Devdutt
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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आस्था
का
रंग
आ
जाए
अगर
माहौल
में
एक
राखी
ज़िंदगी
का
रुख़
बदल
सकती
है
आज
Unknown
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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दर्द
ऐसा
है
कि
जी
चाहे
है
ज़िंदा
रहिए
ज़िंदगी
ऐसी
कि
मर
जाने
को
जी
चाहे
है
Kaleem Aajiz
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पहेली
ज़िंदगी
की
कब
तू
ऐ
नादान
समझेगा
बहुत
दुश्वारियाँ
होंगी
अगर
आसान
समझेगा
Zubair Ali Tabish
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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कोई
ख़ामोश
ज़ख़्म
लगती
है
ज़िन्दगी
एक
नज़्म
लगती
है
Gulzar
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तेरी
ख़ातिर
मैं
भी
गदर
मचा
दूँगा
क्या
ख़बर
थी
की
इस
क़दर
मचा
दूँगा
Manoj Devdutt
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अपनी
हरसल्फ़ी
में
वो
पाउट
करती
है
फिर
हम
जैसे
लड़कों
को
आउट
करती
है
ख़ुद
लड़के
देखे
तो
कोई
बात
नहीं
पर
मैं
लड़की
देखूँ
तो
वो
डाउट
करती
है
मेरी
एक
नहीं
मानी
है
उसने
लेकिन
उसकी
न
जब
मैं
मानूँ
तो
साउट
करती
है
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Manoj Devdutt
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ग़रीब
के
पास
दिल
था
अमीर
के
पास
पैसे
Manoj Devdutt
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ख़ुद
को
ही
ख़ुद
तब
हम
ज़लील
करते
हैं
उस
बे-वफ़ा
को
जब
ख़लील
करते
हैं
Manoj Devdutt
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तूफ़ान
के
निशान
रह
गए
हैं
मलबे
नुमा
मकान
रह
गए
हैं
ओले
पड़े
तभी
यहाँ
सभी
फिर
रोते
हुए
किसान
रह
गए
हैं
बेटी
को
ही
पढ़ाना
था
उसको
दो
ख़ाली
माँ
के
कान
रह
गए
हैं
फल
तो
कभी
मिला
नहीं
हमको
हिस्से
में
इम्तिहान
रह
गए
हैं
इंसानियत
सभी
की
मर
गई
है
मुर्दा
यहाँ
जहान
रह
गए
हैं
चाहत
तो
मार
दी
गई
है
यहाँ
नफ़रत
के
ख़ानदान
रह
गए
हैं
घर
इसलिए
बिखर
रहा
था
एक
दो
भाई
में
गुमान
रह
गए
हैं
माँ
बाप
को
निकालते
ही
घर
में
ख़ाली
मर्तबान
रह
गए
हैं
क्यूँँ
बोलते
नहीं
मनोज
ये
लोग
सब
बनके
बे-ज़बान
रह
गए
हैं
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Manoj Devdutt
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