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Manoj Devdutt
uski dua men jab asar hogaa
uski dua men jab asar hogaa | उसकी दु'आ में जब असर होगा
- Manoj Devdutt
उसकी
दु'आ
में
जब
असर
होगा
बस
तब
हरा
सूखा
शजर
होगा
मैं
सोचता
हूँ
देखकर
तुझको
आगे
तेरे
क्या
वो
क़मर
होगा
तुम
जिस
जगह
पर
रह
रही
हो
अब
जन्नत
का
रस्ता
बस
वो
घर
होगा
तुम
चूम
लेती
होंट
जिसके
भी
बस
वो
ही
दुनिया
में
अमर
होगा
तुम
जिस
मकाँ
को
छोड़कर
आई
वो
बन
गया
अब
तो
खंडर
होगा
- Manoj Devdutt
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बदल
गए
मेरे
मौसम
तो
यार
अब
आए
ग़मों
ने
चाट
लिया
ग़म-गुसार
अब
आए
Farhat Abbas Shah
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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मैं
कुछ
दिन
से
अचानक
फिर
अकेला
पड़
गया
हूँ
नए
मौसम
में
इक
वहशत
पुरानी
काटती
है
Liaqat Jafri
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अहम
जितनी
सुहागन
के
लिए
माथे
की
बिन्दी
है
ज़रूरी
उतनी
हिन्दुस्तान
के
ख़ातिर
ही
हिन्दी
है
Manoj Devdutt
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रात
भर
जागे
नहीं
हैं
हम
घर
से
फिर
भागे
नहीं
हैं
हम
टूट
जाएँ
जल्द
इतने
भी
कच्चे
फिर
धागे
नहीं
हैं
हम
हर
दफ़ा
आगे
रहेगी
तू
कुछ
तेरे
आगे
नहीं
हैं
हम
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Manoj Devdutt
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होंठों
पर
उसके
इक
तिल
था
आया
जिस
पर
मेरा
दिल
था
उसकी
संगत
भारी
पड़ती
अक्सर
बढ़ता
मेरा
बिल
था
जो
भी
उस
सेे
मिलकर
बिछड़ा
वो
तो
मरता
फिर
तिल
तिल
था
दो
नज़रों
से
मारा
करता
ऐसा
इकलौता
क़ातिल
था
जात
अलग
थी,
मेरी
उसकी
फिर
तो
बिछड़ना
मुस्तक़बिल
था
जब
से
उसको
क्या
देखा
है
मनोज
भी
उसका
आमिल
था
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Manoj Devdutt
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जो
रस्ता
मेरे
रस्ते
में
पड़ता
था
नहीं
उस
रस्ते
पर
उसको
छोड़ा
करता
था
मैं
Manoj Devdutt
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पीछे
ख़्वाबों
के
मैं
भागता
हूँ
इसलिए
रातभर
जागता
हूँ
Manoj Devdutt
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