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Manoj Devdutt
ab main kisi ke haath men aata nahin
ab main kisi ke haath men aata nahin | अब मैं किसी के हाथ में आता नहीं
- Manoj Devdutt
अब
मैं
किसी
के
हाथ
में
आता
नहीं
इक
हाथ
से
बस
मैं
निकल
पाता
नहीं
वो
कह
चुकी
है
तुम
चले
जाओ
कहीं
वो
शर्म
हूँ
मैं
जो
कहीं
जाता
नहीं
सूरत
दिखा
दी
है
उसी
ने
अब
मुझे
चेहरा
तभी
कोई
मुझे
भाता
नहीं
टूटा
नहीं
है
दिल
मेरा
बस
इसलिए
ग़ज़लें
तरन्नुम
में
अभी
गाता
नहीं
मैं
हो
गया
हूँ
अब
मुलाज़िम
उसका
ही
मेरा
किसी
से
अब
कोई
नाता
नहीं
बारिश
कभी
भी
हो
उसे
है
भीगना
छतरी
लगा
दूँ
तो
कहे
छाता
नहीं
पहला
निवाला
वो
न
खा
ले
जब
तलक
खाना
कभी
मैं
तब
तलक
खाता
नहीं
- Manoj Devdutt
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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ग़म
में
हम
सूरत-ए-गमख़ार
नहीं
पढ़ते
हैं
इसलिए
मीर
के
अश'आर
नहीं
पढ़ते
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
तस्वीर
से
जा
लगती
हैं
सुब्ह
उठकर
सभी
अख़बार
नहीं
पढ़ते
हैं
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Ashu Mishra
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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तेरी
तस्वीर
हट
जाएगी
लेकिन
नज़र
दीवार
पर
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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जब
आँखों
में
लगाता
हूँ
तो
चुपके-चुपके
हंस-हंसकर
तेरी
तस्वीर
भी
कहती
है,
सूरत
ऐसी
होती
है
Dagh Dehlvi
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मेरे
अश'आर
पढ़ने
वाले
लोग
तेरी
तस्वीर
माँग
बैठे
हैं
Shadab Javed
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इस
सावन
बरसात
नहीं
होगी
अब
उसने
छतरी
जो
ले
ली
है
Manoj Devdutt
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फिर
वही
हम
गुनाह
कर
रहे
हैं
ख़ुद
ख़ुदी
को
तबाह
कर
रहे
हैं
Manoj Devdutt
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लड़कियों
के
अश्क
ही
तो
बस
बहे
हैं
ख़ून
लड़कों
का
मोहब्बत
में
बहा
है
Manoj Devdutt
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मेरी
आँखों
में
कैसा
दर्द
हो
रहा
है
लगता
है
कि
बिछड़कर
मुझ
सेे
वो
रो
रहा
है
क्यूँ
अब
मुझको
दिन
में
ही
नींद
आ
रही
है
वो
रातों
को
जगकर
दिन
में
ही
सो
रहा
है
जिसने
मुझको
सुख
देने
की
ही
ठानी
थी
वो
जीवन
में
फसलें
दुख
की
ही
बो
रहा
है
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Manoj Devdutt
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इंसानियत
दुनिया
में
से
पूरी
तरह
अब
भूलते
ही
जा
रहे
हैं
लोग
सब
फंदा
फँसाकर
दूसरों
के
अब
गले
में
झूलते
ही
जा
रहे
हैं
लोग
सब
Manoj Devdutt
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