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Manish Yadav
tiri soorat nazar aati hai mujh
tiri soorat nazar aati hai mujh | तिरी सूरत नज़र आती है मुझ
- Manish Yadav
तिरी
सूरत
नज़र
आती
है
मुझ
में
आजतक
यूँंँ
ही
कभी
जो
देख
लेता
हूॅं
मैं
अपनी
शक्ल
शीशे
में
- Manish Yadav
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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तुम्हारा
काम
इतना
है
कि
बस
काजल
लगा
लेना
तुम्हारी
आँख
की
ख़ातिर
नज़ारे
मैं
बनाऊँगा
Khalid Nadeem Shani
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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सौ
सौ
उमीदें
बँधती
है
इक
इक
निगाह
पर
मुझ
को
न
ऐसे
प्यार
से
देखा
करे
कोई
Allama Iqbal
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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गली
में
बैठे
हैं
उसकी
नज़र
जमाए
हुए
हमारे
बस
में
फ़क़त
इंतिज़ार
करना
है
Swapnil Tiwari
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हयाती
तुम
गई
हो
तेज़
मुझ
सेे
ज़रा
सा
थम
भी
जाना
चाहिए
था
Manish Yadav
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वो
सर-गुज़श्त
कभी
उनकी
जो
पढ़ी
मैंने
मेरा
ही
नाम
न
आया
मेरी
कहानी
में
Manish Yadav
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भूल
जाने
में
जिनको
ज़माने
लगे
अब
की
बारिश
में
वो
याद
आने
लगे
यह
गया
है
फ़क़त
एक
ही
रास्ता
फिर
यहीं
दिल
किसी
भी
बहाने
लगे
जब
कभी
भी
सुनाई
दिली
दास्ताँ
लोग
ज़ख़्मों
को
अपने
दिखाने
लगे
इक
नया
घर
बनाने
की
ख़्वाहिश
में
अब
हम
पुरानी
दिवारें
गिराने
लगे
आने
जाने
की
जिनकी
न
रहती
ख़बर
इश्क़
में
वो
ही
मौसम
सुहाने
लगे
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Manish Yadav
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अभी
से
दिलों
को
जलाए
हुए
हो
बताओ
कहाँ
ज़ख़्म
खाए
हुए
हो
तुम्हारी
ये
आँखें
बताती
हैं
मुझको
कि
इन
में
किसी
को
बसाए
हुए
हो
हुआ
क्या
जो
कर
ली
मुहब्बत
से
तौबा
बताओ
कि
कितना
सताए
हुए
हो
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Manish Yadav
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इशारा
कोई
तो
कर
दो
कि
वापस
आ
रहे
हो
तुम
किसी
के
क़दमों
की
आहट
मेरी
जानिब
को
आती
है
Manish Yadav
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