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Manish Yadav
rakhe the hifaazat se jo khat maine vo sab aaj
rakhe the hifaazat se jo khat maine vo sab aaj | रक्खे थे हिफाज़त से जो ख़त मैंने वो सब आज
- Manish Yadav
रक्खे
थे
हिफाज़त
से
जो
ख़त
मैंने
वो
सब
आज
वापस
मैं
यहाँ
आया
हूँ
दरिया
में
बहा
के
- Manish Yadav
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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अब
तो
दरिया
सूख
चुका
है
अब
तो
इस
शम्मा
को
बुझा
दो
Siddharth Saaz
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तिरी
सदा
का
है
सदियों
से
इंतिज़ार
मुझे
मिरे
लहू
के
समुंदर
ज़रा
पुकार
मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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सभी
को
ग़म
है
समुंदर
के
ख़ुश्क
होने
का
कि
खेल
ख़त्म
हुआ
कश्तियाँ
डुबोने
का
Shahryar
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चल
दिए
घर
से
तो
घर
नहीं
देखा
करते
जाने
वाले
कभी
मुड़
कर
नहीं
देखा
करते
सीपियां
कौन
किनारे
से
उठा
कर
भागा
ऐसी
बाते
समुंदर
नहीं
देखा
करते
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Unknown
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तूफ़ानों
से
आँख
मिलाओ
सैलाबों
पे
वार
करो
मल्लाहों
का
चक्कर
छोड़ो
तैर
के
दरिया
पार
करो
Rahat Indori
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ये
आग
वाग
का
दरिया
तो
खेल
था
हम
को
जो
सच
कहें
तो
बड़ा
इम्तिहान
आँसू
हैं
Abhishek shukla
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फिर
हुआ
है
वही
जिसका
डर
था
मुझे
अबकी
बारिश
जो
आई
तो
घर
ढह
गया
Manish Yadav
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हमें
दिल
को
लगाना
चाहिए
था
इसे
भी
आज़माना
चाहिए
था
अकेले
का
नहीं
था
देख
ज़िम्मा
तुझे
भी
पास
आना
चाहिए
था
सबब
होता
नहीं
है
शाद
का
यूँँ
हमें
कोई
बहाना
चाहिए
था
हुई
क्या
थी
ख़ता
मेरी
तरफ़
से
हक़ीक़त
को
बताना
चाहिए
था
ख़ुशी
के
क़त्ल
के
बाबत
उदासी
तुझे
भी
जेल
जाना
चाहिए
था
बहक
जाते
मगर
हम
भी
यहाँ
पर
ज़रा
मौसम
सुहाना
चाहिए
था
किताबों
की
तहों
के
बीच
सूखे
गुलाबों
को
दिखाना
चाहिए
था
किनारे
बैठकर
अब
सोचना
क्या
हमें
तो
डूब
जाना
चाहिए
था
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Manish Yadav
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पहचानता
हूँ
अच्छे
से
नीयतें
मैं
उनकी
वो
बातों
से
भी
अपना
ईमान
बेचते
हैं
Manish Yadav
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किए
वादे
जो
उसने
वो
निभाए
ही
नहीं
इक
भी
वो
ऐसा
शख़्स
अब
मुझको
गवारा
हो
नहीं
सकता
Manish Yadav
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मोहब्बत
लफ़्ज़
से
वाक़िफ़
यहाँ
सारा
ज़माना
है
मोहब्बत
जब
कभी
होवे
कहाँ
दिल
का
ठिकाना
है
Manish Yadav
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