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Manish Yadav
hai adhoora gagan badliyon ke bina
hai adhoora gagan badliyon ke bina | है अधूरा गगन बदलियों के बिना
- Manish Yadav
है
अधूरा
गगन
बदलियों
के
बिना
घर
सॅंवरते
नहीं
लड़कियों
के
बिना
- Manish Yadav
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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उसे
अभी
भी
मेरे
दिल
के
हाल
का
नहीं
पता
तो
यानी
उसको
अपने
घर
का
रास्ता
नहीं
पता
ये
तेरी
भूल
है
ऐ
मेरे
ख़ुश-ख़याल
के
मुझे
पराई
औरतों
से
तेरा
राब्ता
नहीं
पता
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Ruqayyah Maalik
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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अभी
ज़िंदा
है
माँ
मेरी
मुझे
कुछ
भी
नहीं
होगा
मैं
घर
से
जब
निकलता
हूँ
दु'आ
भी
साथ
चलती
है
Munawwar Rana
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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वो
शाख़
है
न
फूल,
अगर
तितलियाँ
न
हों
वो
घर
भी
कोई
घर
है
जहाँ
बच्चियाँ
न
हों
Bashir Badr
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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प्यार
क्या
है
ये
हमको
नहीं
थी
ख़बर
एक
अंजान
रिश्ता
निभाने
लगे
Manish Yadav
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देखा
उसे
जो
बज़्म
में
राहत
नहीं
रही
आँखों
को
मेरी
फिर
कोई
चाहत
नहीं
रही
जानिब
मिरी
जो
रब
की
नज़र
उठ
गई
तो
फिर
आलिम
की
मुझको
कोई
इबाहत
नहीं
रही
जबसे
किया
ख़ुदा
के
हवाले
ख़ुदी
को
है
फिर
तब
से
मेरे
दिल
में
क़बाहत
नहीं
रही
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Manish Yadav
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मैं
चाहूँ
तुझे
बस
यही
चाहता
हूँ
खु़दास
भी
चाहत
तिरी
चाहता
हूँ
रहे
दिल
मिरा
तेरे
दिल
के
क़रीब
अब
नज़र
की
इनायत
तिरी
चाहता
हूँ
तले
काट
लूँ
मैं
ये
सारी
की
सारी
तिरी
ज़ुल्फ़
के
ज़िन्दगी
चाहता
हूँ
रहे
ख़ुश
हमेशा
जहाँ
देख
ले
तू
लबों
पे
तिरे
मैं
हँसी
चाहता
हूँ
रहे
तेरी
आँखों
का
काजल
सलामत
न
आँसू
हों
इनपे
कभी
चाहता
हूँ
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Manish Yadav
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ज़ेहन
में
है
कितना
दर्द
तुमको
कुछ
दिखाऊॅं
क्या
जौन
हूँ
न
मीर
तुमको
यार
कुछ
सुनाऊॅं
क्या
आज-कल
बहुत
अकेले
रहते
हो
सुना
है
ये
गर
हो
हुक्म
तो
कहो
के
ख़्वाब
में
मैं
आऊॅं
क्या
राह
भटके
हैं
पथिक
गुज़र
के
कूचे
से
तिरे
जो
हैं
ये
रिवायतें
मैं
भी
अब
आजमाऊॅं
क्या
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Manish Yadav
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तुम
जिस्मों
का
प्यार
समझ
बैठे
हमको
तो
रूहों
तक
जाना
था
Manish Yadav
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