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Jaypratap chauhan
mujhe ab chhodkar kyun ja rahe ho tum
mujhe ab chhodkar kyun ja rahe ho tum | मुझे अब छोड़कर क्यूँँ जा रहे हो तुम
- Jaypratap chauhan
मुझे
अब
छोड़कर
क्यूँँ
जा
रहे
हो
तुम
निगाहें
मोड़कर
क्यूँँ
जा
रहे
हो
तुम
मिरा
दिल
उस
दफा़
तुमने
ही
तोड़ा
था
दुबारा
तोड़कर
क्यूँँ
जा
रहे
हो
तुम
बचीं
सांसें
अभी
मेरे
बदन
में
हैं
कफ़न
फिर
छोड़कर
क्यूँँ
जा
रहे
हो
तुम
- Jaypratap chauhan
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कुछ
इस
सलीक़े
से
माथे
पे
उसने
होंट
रखे
बदन
को
छोड़
के
सारी
थकन
को
चूम
लिया
Harsh saxena
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बदन
का
ज़िक्र
बातिल
है
तो
आओ
बिना
सर
पैर
की
बातें
करेंगे
Fahmi Badayuni
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जिस्म
के
पार
जाना
पड़ा
था
कभी
इश्क़
कर
के
हुई
बंदगी
की
समझ
Neeraj Neer
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ख़ुद
हुस्न
से
न
पूछिए
ता'रीफ़
हुस्न
की
दीवाने
से
ये
पूछिए
दीवाना
क्यूँँ
हुआ
Ameer Imam
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कभी
कभार
उसे
देख
लें
कहीं
मिल
लें
ये
कब
कहा
था
कि
वो
ख़ुश-बदन
हमारा
हो
Parveen Shakir
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कभी
देखा
नहीं
जिसने
बदन
के
आगे
कुछ
भी
भला
वो
क्यूँ
मुहब्बत
जावेदाना
ढूँढता
है
Chandan Sharma
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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हम
इन
आँखों
से
उसे
हर
रोज़
पढ़ते
आए
हैं
वो
बदन
तो
याद
है
दो
के
पहाड़े
की
तरह
Ankit Maurya
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बदन
का
सारा
लहू
खिंच
के
आ
गया
रुख़
पर
वो
एक
बोसा
हमें
दे
के
सुर्ख़-रू
है
बहुत
Zafar Iqbal
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दिसंबर
की
सर्दी
है
उसके
ही
जैसी
ज़रा
सा
जो
छू
ले
बदन
काँपता
है
Amit Sharma Meet
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गुम-शुदा
और
बेकार
मैं
हो
गया
वो
गई
और
बीमार
मैं
हो
गया
इल्म
इक
भी
हुनर
का
नहीं
था
मुझे
वो
मिली
और
फ़नकार
मैं
हो
गया
खेल
खेला
नहीं
ज़िंदगी
से
कभी
इक
दफ़ा
खेलकर
हार
मैं
हो
गया
आज
ऐसा
जलाया
किसी
ने
मुझे
देख
कैसे
न
अंगार
मैं
हो
गया
मानते
थे
कभी
जो
मुझे
वो
ख़ुदा
लो
ग़ज़ब
आज
ख़ुद्दार
मैं
हो
गया
बस
लगाई
नहीं
थी
नशे
की
तलब
अब
नशे
का
तलबगार
मैं
हो
गया
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Jaypratap chauhan
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नशे
में
भूल
जाता
हूँ
उसे
साक़ी
युहीं
थोड़ी
बुरी
ये
लत
लगाई
है
Jaypratap chauhan
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चाँदनी
के
सहारे
बड़े
शौक़
से
चमचमाते
हैं
तारे
बड़े
शौक़
से
भूक
जब
जब
लगी
जिस्म
की
जो
उन्हें
हमने
कपड़े
उतारे
बड़े
शौक़
से
दिल
हमारा
बहुत
क़ीमती
था
मगर
लुट
गया
दिन
दहाड़े
बड़े
शौक़
से
ज़िन्दगी
में
कभी
मात
खाए
नहीं
और
उन
सेे
थे
हारे
बड़े
शौक़
से
जिन
ख़तों
को
कभी
पास
रखती
थी
वो
एक
दिन
उसने
फाड़े
बड़े
शौक़
से
कल
तलक
तो
हमें
आप
जी
जी
कहा
आज
कहती
हो
जा
रे
बड़े
शौक़
से
जय
सुना
है
महीने
कई
तुमने
भी
बेबसी
में
गुज़ारे
बड़े
शौक़
से
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Jaypratap chauhan
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जाने
न
कुछ
भी
बे-ख़बर
ये
ज़िंदगी
लगने
लगी
अब
बे-असर
ये
ज़िंदगी
पड़ने
लगी
मेरे
बदन
पे
झुर्रियाँ
अब
तो
करे
मेरी
क़दर
ये
ज़िंदगी
कोई
न
है
रहबर
न
कोई
यार
है
ऐसे
नहीं
होगी
बसर
ये
ज़िंदगी
कोई
शिकायत
हो
अगर
कह
दो
मुझे
मुझ
पर
बची
है
मुख़्तसर
ये
ज़िंदगी
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Jaypratap chauhan
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तुझ
सेे
मोहब्बत
अब
ख़ुदा-रा
तो
न
हो
जो
क़त्ल
हो
तो
फिर
हमारा
तो
न
हो
Jaypratap chauhan
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