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Jaypratap chauhan
jaane na kuchh bhi be-KHabar ye zindagi
jaane na kuchh bhi be-KHabar ye zindagi | जाने न कुछ भी बे-ख़बर ये ज़िंदगी
- Jaypratap chauhan
जाने
न
कुछ
भी
बे-ख़बर
ये
ज़िंदगी
लगने
लगी
अब
बे-असर
ये
ज़िंदगी
पड़ने
लगी
मेरे
बदन
पे
झुर्रियाँ
अब
तो
करे
मेरी
क़दर
ये
ज़िंदगी
कोई
न
है
रहबर
न
कोई
यार
है
ऐसे
नहीं
होगी
बसर
ये
ज़िंदगी
कोई
शिकायत
हो
अगर
कह
दो
मुझे
मुझ
पर
बची
है
मुख़्तसर
ये
ज़िंदगी
- Jaypratap chauhan
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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वक़्त-ए-रुख़्सत
आब-दीदा
आप
क्यूँँ
हैं
जिस्म
से
तो
जाँ
हमारी
जा
रही
है
Azm Shakri
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अब
सुलगती
है
हथेली
तो
ख़याल
आता
है
वो
बदन
सिर्फ़
निहारा
भी
तो
जा
सकता
था
Ameer Imam
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कभी
देखा
नहीं
जिसने
बदन
के
आगे
कुछ
भी
भला
वो
क्यूँ
मुहब्बत
जावेदाना
ढूँढता
है
Chandan Sharma
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जिस्म
आया
किसी
के
हिस्से
में
दिल
किसी
और
की
अमानत
है
Shariq Kaifi
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इसी
कारण
से
मैं
उसका
बदन
छूता
नहीं
यारों
मुझे
मालूम
है
क़िस्मत
में
वो
लिक्खा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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एक
मुद्दत
से
परिंदे
की
तरह
ये
क़ैद
है
रूह
मेरे
जिस्म
से
'क़ासिद'
रिहा
होती
नहीं
Gurbir Chhaebrra
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है
उस
बदन
की
लत
मुझे
सो
दूसरा
बदन
अच्छा
तो
लग
रहा
है
मेरे
काम
का
नहीं
Vishnu virat
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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चाँदनी
के
सहारे
बड़े
शौक़
से
चमचमाते
हैं
तारे
बड़े
शौक़
से
भूक
जब
जब
लगी
जिस्म
की
जो
उन्हें
हमने
कपड़े
उतारे
बड़े
शौक़
से
दिल
हमारा
बहुत
क़ीमती
था
मगर
लुट
गया
दिन
दहाड़े
बड़े
शौक़
से
ज़िन्दगी
में
कभी
मात
खाए
नहीं
और
उन
सेे
थे
हारे
बड़े
शौक़
से
जिन
ख़तों
को
कभी
पास
रखती
थी
वो
एक
दिन
उसने
फाड़े
बड़े
शौक़
से
कल
तलक
तो
हमें
आप
जी
जी
कहा
आज
कहती
हो
जा
रे
बड़े
शौक़
से
जय
सुना
है
महीने
कई
तुमने
भी
बेबसी
में
गुज़ारे
बड़े
शौक़
से
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Jaypratap chauhan
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कई
शायर
गए
आए
मगर
जय
तुम्हारी
बात
जो
है
वो
अलग
है
Jaypratap chauhan
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मुझे
अब
तो
सताना
छोड़
दो
तुम
सुनो
जलवे
दिखाना
छोड़
दो
तुम
तुम्हारी
ये
हँसी
पागल
बनाए
सुनो
यूँँ
मुस्कुराना
छोड़
दो
तुम
तुम्हें
कोई
छुए
तो
खूँ
जले
है
सुनो
मिलना
मिलाना
छोड़
दो
तुम
बड़ी
मदहोश
हैं
ये
शोख़
नज़रें
सुनो
काजल
लगाना
छोड़
दो
तुम
सुनो
अब
तो
मिरे
तुम
होंठ
चूमो
गले
से
अब
लगाना
छोड़
दो
तुम
कभी
तो
साथ
में
गुज़रेंगी
रातें
अरे
तकिया
दबाना
छोड़
दो
तुम
लबों
को
चूमती
हो
पर
सुनो
जाँ
लबों
को
बस
चबाना
छोड़
दो
तुम
मुझे
बाँहों
में
भरती
हो
भरो
जाँ
मगर
नाखु़न
गड़ाना
छोड़
दो
तुम
तुम्हीं
ने
तो
बनाया
जय
दिवाना
चलो
उसको
दिवाना
छोड़
दो
तुम
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Jaypratap chauhan
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तुझ
सेे
मोहब्बत
अब
ख़ुदा-रा
तो
न
हो
जो
क़त्ल
हो
तो
फिर
हमारा
तो
न
हो
Jaypratap chauhan
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दिए
जो
ख़त
तुम्हें
हमने
उन्हें
तुमने
जलाया
क्यूँँ
किए
वादे
सभी
थे
जो
नहीं
उनको
निभाया
क्यूँँ
Jaypratap chauhan
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