ye haara hua man thakan tan kii dhona | ये हारा हुआ मन थकन तन की ढोना

  - Lalit Mohan Joshi
येहाराहुआमनथकनतनकीढोना
हुआदर्दक्यूँँइतनाछायाअँधेरा
यूँँचेहरेपेदिखतीशिकनआजतेरी
ग़मोंकीयेबातेंबताराज़क्याक्या
कोईचालचलदोज़रादेरकोतुम
करोमुझकोबर्बादतुमऔरथोड़ा
कोईभीसहारामिलाहैनहींअब
यहाँदोस्तजबसेतुम्हेंहैबनाया
वोप्यारीवोमीठीवोबातेंतुम्हारी
हुनरतीनचेहरोंकाकैसेहैआया
'ललित'कीकहानीसभीकोबसाया
उसीकोमगरक्यूँनिकालागयाथा
  - Lalit Mohan Joshi
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