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Lalit Mohan Joshi
main bhale is bazm men anjaan hooñ
main bhale is bazm men anjaan hooñ | मैं भले इस बज़्म में अनजान हूँ
- Lalit Mohan Joshi
मैं
भले
इस
बज़्म
में
अनजान
हूँ
बाद
मरने
के
तो
गाया
जाएगा
- Lalit Mohan Joshi
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दफ़्तर
तक
जाकर
के
वापस
लौटा
हूँ
गले
लगाना
भूल
गया
था
तुमको
मैं
Tanoj Dadhich
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कुछ
इस
तरह
से
याद
आते
रहे
हो
कि
अब
भूल
जाने
को
जी
चाहता
है
Akhtar Shirani
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याद
भूले
हुए
लोगों
को
किया
जाता
है
भूल
जाओ
कि
तुम्हें
याद
किया
जाएगा
Charagh Sharma
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हम
तो
समझे
थे
कि
हम
भूल
गए
हैं
उन
को
क्या
हुआ
आज
ये
किस
बात
पे
रोना
आया
Sahir Ludhianvi
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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मैं
भूल
चुका
हूँ
कि
ये
वनवास
है
वन
है
इस
वक़्त
मेरे
सामने
सोने
का
हिरन
है
मैं
ध्यान
से
कुछ
सुन
ही
नहीं
पाऊँगा
सरकार
मैं
क्या
ही
बताऊँ
कि
मेरा
ध्यान
मगन
है
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Vikram Gaur Vairagi
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भूल
जाना
तुझे
नहीं
मुश्किल
जानता
हूँ,
मगर
नहीं
होता
Harman Dinesh
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किसी
को
याद
रख
के
भूल
जाना
किसी
का
भूल
जाना
याद
रहना
Rachit Dixit
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मैं
कहता
हूँ
"सुनो
लड़की!
मुझे
कुछ
तुम
से
कहना
था"
वो
ऐसे
पूछती
है
फिर
मैं
सब
कुछ
भूल
जाता
हूँ
Shadab Asghar
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हमने
ही
लौटने
का
इरादा
नहीं
किया
उसने
भी
भूल
जाने
का
वा'दा
नहीं
किया
Parveen Shakir
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बात
को
दिल
में
दबाए
रखता
हूँ
ऐसे
मैं
ख़ुद
को
सताए
रखता
हूँ
सब्ज़
क्यूँ
करते
हो
ज़ख़्मों
को
मेरे
जब
उन्हें
मैं
ही
छुपाए
रखता
हूँ
ज़िंदगी
की
कश्ती
यूँँ
चलती
है
अब
राब्ता
ग़म
से
बनाए
रखता
हूँ
क्या
तुम्हें
मालूम
हैं
ख़ुद
को
फ़क़त
उसके
अबरू
से
बचाए
रखता
हूँ
कर
ली
है
फूलों
ने
मुझ
सेे
दूरियाँ
चाँद
को
जबसे
रिझाए
रखता
हूँ
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Lalit Mohan Joshi
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दोस्ती
जब
सवाल
बनती
है
ज़िंदगी
तब
मुहाल
बनती
है
दूर
ख़ुद
से
हुए
जो
हम
यारो
ये
ख़बर
ला-ज़वाल
बनती
है
रोशनी
तो
ये
तम
चुराती
सब
तब
यहाँ
वो
जमाल
बनती
है
दोस्ती
से
फ़क़त
ये
दुनिया
अब
मानो
हुस्न-ओ-जमाल
बनती
है
राब्ता
देखकर
मिरा
उसका
सब
ज़ुबाँ
बे-सवाल
बनती
है
धड़कनों
में
बसी
है
जो
लड़की
वो
फ़क़ीद-उल-मिसाल
बनती
है
प्यार
के
बिन
ये
ज़िंदगी
सबकी
सो
ललित
बस
मुहाल
बनती
है
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Lalit Mohan Joshi
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बुलाया
आपने
आभार
पूरे
दिल
से
करता
हूँ
दिया
सम्मान
ये
आभार
पूरे
दिल
से
करता
हूँ
यही
उम्मीद
अब
है
आपसे
यूँँ
ही
बुलाओगे
नमन
के
साथ
ये
आभार
पूरे
दिल
से
करता
हूँ
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Lalit Mohan Joshi
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झूठा
हम
मुस्कुराते
हुए
घर
से
दफ़्तर
को
जाते
हुए
यार
किरदार
सब
हैं
मगर
मिट
रहे
सब
कमाते
हुए
क्या
कहे
ख़ुद
कहानी
को
हम
ख़ुद
को
बस
आज़माते
हुए
मैं
कभी
सोचता
हूँ
यहाँ
टूटना
क्यूँ
सजाते
हुए
हक़
में
तेरे
ये
अब
दर्द
है
कहता
वो
लड़खड़ाते
हुए
ये
समुंदर
दुखी
हो
गया
मेरे
ग़म
को
बताते
हुए
आइना
लेकर
आना
मगर
झूठा
चेहरा
छुपाते
हुए
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Lalit Mohan Joshi
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ये
नदियाँ
ये
नाले
ये
बादल
पुराने
हुए
जा
रहे
यार
पल
पल
पुराने
दु'आओं
में
माँगे
हमें
एक
लड़की
उसी
के
लिए
हम
तो
पागल
पुराने
सदी
का
नहीं
है
कोई
दोष
यारो
रहे
जैसे
हम
तो
मुसलसल
पुराने
करेंगे
नहीं
कोई
भी
काम
ऐसा
जिसे
देख
बरसें
वो
बादल
पुराने
चलो
अब
कहीं
दूर
मंज़िल
तलाशें
जहाँ
काम
सब
हों
मुकम्मल
पुराने
मेरे
ग़म
मिटाने
को
माँ
बैठती
है
अभी
भी
नए
हैं
वो
आँचल
पुराने
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Lalit Mohan Joshi
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