ik khila phool murjha gaya hai yahaañ | इक खिला फूल मुरझा गया है यहाँ

  - Lalit Mohan Joshi
इकखिलाफूलमुरझागयाहैयहाँ
माँकेबच्चेकोमारागयाहैयहाँ
शा'इरीकोसहारामिलाहीनहीं
बसउसेआज़मायागयाहैयहाँ
पेड़कीछाँवसेदोस्तीथीमगर
धूपसेघरबनायागयाहैयहाँ
बाग़सूनेहैंपत्तेभीख़ामोशहैं
खेलबच्चोंकाछीनागयाहैयहाँ
राब्तेसबइमोजीमेंसिमटेहुए
दौरकैसामियाँगयाहैयहाँ
हाथमेंफोनहैमनउदासीभरा
येग़ज़बहालदेखागयाहैयहाँ
इकनदीरोरहीथीयूँँचुपचापसे
जैसेबच्चारुलायागयाहैयहाँ
झीलसूखीहैजंगलभीवीरानहै
क्यूँज़मींकोमिटायागयाहैयहाँ
ज़िंदगीकीहक़ीक़तललितहैयही
हरक़दमपरगिरायागयाहैयहाँ
ज़िंदगीयारअवसादमेंहैललित
रस्सीपंखागलेगयाहैयहाँ
  - Lalit Mohan Joshi
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