dard kuchh yuñ badh gaya hai | दर्द कुछ यूँँ बढ़ गया है

  - Lalit Mohan Joshi
दर्दकुछयूँँबढ़गयाहै
आँखोंसेदरियाबहाहै
गएकिसमोड़परअब
सिललबोंकोअबलियाहै
फिरमगरक़िस्सासुनोअब
रोज़माँगीइकदु'आहै
मिलगयाराहीहमेंजब
फिरनहींरहताख़फ़ाहै
बातेंकरताहैबहुतही
चुपनहींक्यूँहोरहाहै
गाँवहैसुंदरबड़ाफिर
शहरसरहताजुदाहै
हमलिखेंगेआजक़िस्सा
दोस्तीकोरबलिखाहै
प्यारसेरहनासिखाया
प्यारहीसबकुछलिखाहै
हमसमुंदरमेंनहींहैं
हमनेउसकोभीपढ़ाहै
आँखोंसेआँसूबहेहैं
दर्दकामतलबदवाहै
रातगहरीहोरहीहै
वोग़ज़लइकलिखसकाहै
घरकेपरदेगिरगएहैं
याददिलनेफिरकियाहै
यारचादरहैमुड़ीजो
कौनदिलकोभागयाहै
वोहमेंफिरक्यूँरुलाता
दूरजबउसनेकियाहै
  - Lalit Mohan Joshi
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