chaand kii apni yahaañ pe chaandni hai | चाँद की अपनी यहाँ पे चाँदनी है

  - Lalit Mohan Joshi
चाँदकीअपनीयहाँपेचाँदनीहै
दोस्तोक्यूँमुझ
मेंतन्हाईबसीहै
तालियाँभीयारउसकोमिलगईंअब
बातबिनसरपैरकीजिसनेकहीहै
आपकेरस्तेउजालेहैबहुतपर
क्यूँमेरीज़िंदगीमेंरौशनीहै
भूलनेकोभूलजाऊँमैंमगरफिर
वोज़मींकीयारहरशयमेंबसीहै
कामआधेरहगएहैंमेरेसारे
यादरखनाउम्रमेरीढलरहीहै
रोज़रोनाकिसलिएकरतेहैहमसब
सचयहीहैमौतआनीइकघड़ीहै
रातकोतकतेरहामैंजागनेतक
रातआईदिनहुआयेज़िंदगीहै
आपतोरोतेनहींकहतेहैंसबलोग
क्याकहूँअबआँखपत्थरहोगईहै
ख़ामुशीहदसेज़ियादाहोगईदोस्त
सिलसिलाअबइकनयाहोनाकोईहै
इसबुरीदुनियाकीनज़रोंसेयहाँफिर
बेटियोंकीरूहयानीअबडरीहै
  - Lalit Mohan Joshi
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