ha | हमें दर्द दे कर सबब पूछते हैं

  - Lalit Mohan Joshi
हमेंदर्ददेकरसबबपूछतेहैं
वहीहैंग़लतपरसबबपूछतेहैं
हमींनेहैख़ुदकोमिटायायहाँपर
यूँँबर्बादख़ुदकरसबबपूछतेहैं
लगातेहैंपहलेजोघरआगफिरवो
हमेंकरकेबे-घरसबबपूछतेहैं
यहाँरोज़पीतेजोदसबीससिगरेट
धुआँज़िंदगीकरसबबपूछतेहैं
रुलानेकीफ़ितरतहैदुनियाकीयारो
सभीफिररुलाकरसबबपूछतेहैं
यहाँज़ेहनमेंज़हरपालेहुएलोग
वोसबहैंग़लतपरसबबपूछतेहैं
घड़ीकीसुईकेउलटयारचलते
वोख़ुदकोहराकरसबबपूछतेहैं
'ललित'ख़ुदकेरस्तेचलाहैमगरक्यूँँ
क़दम-दर-क़दमपरसबबपूछतेहैं
  - Lalit Mohan Joshi
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