hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Lalit Mohan Joshi
aapke raste men phool main ab sajaane laga
aapke raste men phool main ab sajaane laga | आपके रस्ते में फूल मैं अब सजाने लगा
- Lalit Mohan Joshi
आपके
रस्ते
में
फूल
मैं
अब
सजाने
लगा
अपने
ही
ख़ून
से
शूल
पथ
के
हटाने
लगा
हिज्र
की
रात
कटती
नहीं
है
बताओ
ज़रा
आग
अब
शहर
में
हिज्र
क्यूँँ
फिर
लगाने
लगा
तौर
मुझको
सिखाना
नई
नस्ल
को
है
यहाँ
रोज़
फिर
अपने
मैं
ख़ून
से
ही
नहाने
लगा
- Lalit Mohan Joshi
Download Ghazal Image
काँटे
तो
ख़ैर
काँटे
हैं
इस
का
गिला
ही
क्या
फूलों
की
वारदात
से
घबरा
के
पी
गया
Saghar Siddiqui
Send
Download Image
27 Likes
एक
तितली
से
वा'दा
है
सो
गुलशन
में,
ग़लती
से
भी
ख़ार
नहीं
देखूँगा
मैं
(ख़ार-
काँटें
)
Read Full
Darpan
Send
Download Image
36 Likes
काँटे
बनकर
वापस
क्यूँँ
आ
जाते
हैं?
हमने
तुमको
फूल
जो
भेजे
होते
हैं
Riyaz Tariq
Send
Download Image
27 Likes
गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
Send
Download Image
41 Likes
बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
32 Likes
तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
54 Likes
ये
धोखे
देता
आया
है
दिल
को
भी
दुनिया
को
भी
इसके
छल
ने
खार
किया
है
सहरा
में
लैला
को
भी
Jaun Elia
Send
Download Image
35 Likes
रिश्तों
की
ये
नाज़ुक
डोरें
तोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं,
अपनी
आँखें
दुखती
हों
तो
फोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Read Full
Subhan Asad
Send
Download Image
46 Likes
कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
Read Full
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
96 Likes
ये
कांटे,
ये
धूप,
ये
पत्थर
इनसे
कैसा
डरना
है
राहें
मुश्किल
हो
जाएँ
तो
छोड़ी
थोड़ी
जाती
हैं
Subhan Asad
Send
Download Image
29 Likes
Read More
नवम्बर
मेरा
कुछ
अपना
नहीं
है
उसी
की
याद
में
तपना
नहीं
है
करेगी
कॉल
मुझको
वो
यक़ीनन
ये
अच्छा
देखना
सपना
नहीं
है
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Send
Download Image
4 Likes
चाँद
की
अपनी
यहाँ
पे
चाँदनी
है
दोस्तो
क्यूँ
मुझ
में
तन्हाई
बसी
है
तालियाँ
भी
यार
उसको
मिल
गईं
अब
बात
बिन
सर
पैर
की
जिसने
कही
है
आपके
रस्ते
उजाले
है
बहुत
पर
क्यूँ
न
मेरी
ज़िंदगी
में
रौशनी
है
भूलने
को
भूल
जाऊँ
मैं
मगर
फिर
वो
ज़मीं
की
यार
हर
शय
में
बसी
है
काम
आधे
रह
गए
हैं
मेरे
सारे
याद
रखना
उम्र
मेरी
ढल
रही
है
रोज़
रोना
किसलिए
करते
है
हम
सब
सच
यही
है
मौत
आनी
इक
घड़ी
है
रात
को
तकते
रहा
मैं
जागने
तक
रात
आई
दिन
हुआ
ये
ज़िंदगी
है
आप
तो
रोते
नहीं
कहते
हैं
सब
लोग
क्या
कहूँ
अब
आँख
पत्थर
हो
गई
है
ख़ामुशी
हद
से
ज़ियादा
हो
गई
दोस्त
सिलसिला
अब
इक
नया
होना
कोई
है
इस
बुरी
दुनिया
की
नज़रों
से
यहाँ
फिर
बेटियों
की
रूह
यानी
अब
डरी
है
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
3 Likes
दरयाफ़्त
अपने
मुश्किलों
की
तुम
करो
यूँँ
बात
अपनी
मंज़िलों
की
तुम
करो
इक
बात
ये
मुझको
बताओ
तुम
ज़रा
क्यूँँ
बात
फिर
अब
बुज़दिलों
की
तुम
करो
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Send
Download Image
3 Likes
आख़िरी
मुलाक़ात
याद
है
दोस्त
क्यूँ
वो
सब
बात
याद
है
दर्द
देख
कितना
दिया
मुझे
दोस्त
क्यूँ
वो
हर
रात
याद
है
याद
है
दिसंबर
बहुत
मुझे
सर्द
वो
मुझे
रात
याद
है
कैसे
यार
उसने
छुआ
मुझे
यार
वो
मुझे
घात
याद
है
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
5 Likes
आस
का
दीपक
जला
कर
हम
चलें
मुश्किलों
का
दिल
दुखा
कर
हम
चलें
हैं
धुआँ
डर
का
यहाँ
माना
मगर
हौसला
रब
से
अता
कर
हम
चलें
एक
दिन
मंज़िल
तो
मिल
ही
जाएँगी
ख़्वाब
आँखों
में
सजा
कर
हम
चलें
हम
गिरे
हर
मोड़
हर
रस्ते
यहाँ
सीख
उन
सेे
यार
पा
कर
हम
चलें
क्यूँ
रुकें
हम
क्यूँ
झुकें
यारो
यहाँ
रास्ता
ख़ुद
का
बना
कर
हम
चलें
अब
'ललित'
जोश-ए-जुनूँ
थमने
न
पाए
बस
सफ़र
में
मुस्कुरा
कर
हम
चलें
Read Full
Lalit Mohan Joshi
Download Image
0 Likes
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Patang Shayari
Dhokha Shayari
Education Shayari
Cigarette Shayari
Mausam Shayari