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Kunu
yaar ik dua yuñ bahaal ho
yaar ik dua yuñ bahaal ho | यार इक दु'आ यूँँ बहाल हो
- Kunu
यार
इक
दु'आ
यूँँ
बहाल
हो
राह
में
उसे
भी
मलाल
हो
वो
करे
दवा
शहर
शहर
में
और
नाज़
उसका
जमाल
हो
- Kunu
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नारसा
मर्द
फ़ज़ा
तक
क़ाबिल
बारहा
रात
कटा
पत्थर
में
Kunu
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बाद
तेरे
नहीं
खो
सका
रात
में
और
ये
बूद
पैदा
नहीं
गात
में
हो
चुकी
इल्तिजा
फ़र्ज़
सब
नाज
से
फिर
भी
ये
नाज़ुकी
ना-रसा
बात
में
मैं
कहीं
मर
चुका
बारहा
रास
पे
मत
रहो
हर
दफ़ा
इस
दवा
जात
में
पुरशिकन
अंजुमन
ख़ानमाँ
दूद
सब
जी
गया
यार
एक
आरज़ू
मात
में
हो
रहा
राज़दाँ
नारसाई
कुनू
जान
पड़ती
क़ज़ा
अब
यही
सात
में
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Kunu
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नाज़
है
यूँँ
अजीब
कहलाऊॅं
यार
अपना
रक़ीब
कहलाऊॅं
थूक
दूँ
कुछ
यहाँ
वहाँ
वहशत
और
मैं
भी
अदीब
कहलाऊॅं
बारहा
रास्त
लिख
रहा
जो
यूँँ
इल्तिजा
है
सलीब
कहलाऊॅं
शुक्रिया
मत
कहो
मुझे
साहिब
आरज़ू
है
तबीब
कहलाऊॅं
लिख
रहा
नज्म़
रूह
पे
कामिल
ख़्वाब
है
इक
नजीब
कहलाऊँ
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Kunu
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कहाँ
हम
सुखन
का
क़मर
जानते
हैं
मगर
इस
इरम
का
असर
जानते
हैं
हुआ
इक
कहानी
तमाशा
क़ज़ा
जब
ख़फ़ा
सब
गुलिस्ताँ
ख़बर
जानते
हैं
जहाँ
भी
अदा
बारहा
इल्तिजा
तो
वफ़ा
से
अमाँ
की
नजर
जानते
हैं
नहीं
है
जुनूँ
दरमियाँ
हम-ज़बाँ
जब
बयाबाँ
बयाबाँ
बसर
जानते
हैं
हुआ
है
मुक़र्रर
रवानी
कुनू
सब
भला
अब
इसी
में
जिगर
जानते
हैं
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Kunu
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और
कुछ
राद
सुना
वहशत
में
बन
गया
दर्द
क़ज़ा
वहशत
में
सब
जुनूँ
बूद
सक़ाफ़त
तक
ही
कुछ
नहीं
नाज़
वफ़ा
वहशत
में
ना-रसा
आब
लबों
का
तेरे
बे-मज़ा
रात
किता
वहशत
में
आरज़ू
बाब
मिरे
पैरामन
बारहा
यार
फ़ना
वहशत
में
पेशतर
राह
बना
क़ातिल
तक
और
फिर
वार
हुआ
वहशत
में
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Kunu
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