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Kumar Aryan
jaane kitne door hue
jaane kitne door hue | जाने कितने दूर हुए
- Kumar Aryan
जाने
कितने
दूर
हुए
जबसे
हम
मशहूर
हुए
कैसा
मरहम
है
उनका
ज़ख़्म
सभी
नासूर
हुए
मौत
लगी
संगी
साथी
भूख
से
जब
मजबूर
हुए
चोट
नहीं
लगती
अब
तो
जब
से
हम
मज़दूर
हुए
- Kumar Aryan
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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शाख़-दर-शाख़
होती
है
ज़ख़्मी
जब
परिंदा
शिकार
होता
है
Indira Varma
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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वो
बड़े
प्यार
से
कहते
हैं
कि
आप
अपने
हैं
और
अपनों
को
ही
तो
ज़ख़्म
दिए
जाते
हैं
Akash Rajpoot
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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हाथ
काँटों
से
कर
लिए
ज़ख़्मी
फूल
बालों
में
इक
सजाने
को
Ada Jafarey
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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और
क्या
यार
चाहता
हूँ
मैं
बस
तेरा
प्यार
चाहता
हूँ
मैं
जो
चले
उम्र
भर
मेरे
बाहम
दोस्त
दो
चार
चाहता
हूँ
मैं
दोस्ती
हो
या
दुश्मनी
यारब
आर
या
पार
चाहता
हूँ
मैं
जिस
सेे
शिकवा
न
हो
किसी
को
भी
हाँ
वो
किरदार
चाहता
हूँ
मैं
जो
मिटा
दे
जहाँ
से
नफरत
को
ऐसी
सरकार
चाहता
हूँ
मैं
जीत
भी
जाऊँ
गर
ज़माने
को
आपसे
हार
चाहता
हूँ
मैं
वक़्त
आख़िर
है
आ
भी
जा
ज़ालिम
सिर्फ़
दीदार
चाहता
हूँ
मैं
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Kumar Aryan
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तानसेन
आप
हो
तो
हो
मैं
तो
बावरा
हूँ
बावरा
Kumar Aryan
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जाना
तय
है
जाएगी
ही
छोड़कर
रूह
ये
रिश्ता
बदन
से
तोड़कर
क़द्र
करना
सीखो
वरना
जाएगी
ये
ख़ुशी
मुँह
ज़िन्दगी
से
मोड़कर
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Kumar Aryan
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कैसे
हुई
है
तर्बियत
ये
जानता
हूँ
मैं
ऐ
साँप
के
बच्चे
तुझे
पहचानता
हूँ
मैं
Kumar Aryan
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काँच
की
चूड़ी
की
है
औक़ात
मेरी
हेम
का
कंगन
कहाँ
दे
पाऊँगा
मैं
Kumar Aryan
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