main khud ko hi samjhaata hooñ haan ye ghalti meri hai | मैं ख़ुद को ही समझाता हूँ, हाँ ये ग़लती मेरी है

  - Divya 'Kumar Sahab'
मैंख़ुदकोहीसमझाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
परखोनेसेघबराताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
तुझकोखोनेकीआँधीमेंजबमनबुझसाजातातो
फिरदिलकोमैंसुलगाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
बातहुई?कैसीहैवो?कुछपूछामेरेबारेमें?
बसइनकोहीदोहराताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
कहींनहींमिलतीतूफिर,दिलअपनातुझकोजानतभी
फिरख़ुदसमैंबतियाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
तेरेसपनेसोनेसेपहलेभरजातेआँखोंमें
सिरहानेफिरटपकाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
सभीबहाकरसपनेसिरहाने,भारीपलकेंगिरतीं
तोसामनेतुझेपाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
मैंनेबसइतनाचाहा,होजीवनतेरेसाथसभी
परपागलमैंकहलाताहूँ,हाँयेग़लतीमेरीहै
  - Divya 'Kumar Sahab'
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy